उज्जैन। जिले में कानून व्यवस्था, लोकशांति और आमजन की सुरक्षा को बनाये रखने के लिये कलेक्टर/ जिला दंडाधिकारी रोशन कुमार सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (1) लागू करते हुये प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। आदेश 3 नवंबर से प्रभावशाली होकर आगामी दो माह तक पूरे जिले में रहेगा।
दीपावली से पहले जिले में कानून व्यवस्था के साथ शांति बनाये रखने के उद्देश्य से लागू की धारा 163 (1) के अंतर्गत अब सार्वजनिक स्थानों पर धारदार हथियार, आग्नेय अस्त्र-शस्त्र, हॉकी, डंडा और रॉड लेकर चलने पर प्रतिबंध लगाया गया है। बिना अनुमति सभा, धरना, प्रदर्शन, जुलूस, रैली और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जा सकेंगे। डीजे, बैंड और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर भी निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भी सख्ती की है। फेसबुक, व्हाट्सएप, ई-मेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर धर्म, जाति, समाज या किसी व्यक्ति के खिलाफ आपत्तिजनक, भड़काऊ अथवा कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाली पोस्ट, फोटो, कमेंट, बैनर और संदेश अपलोड या प्रसारित करने पर प्रतिबंध रहेगा।
जुलूस में पेट्रोल-एसिड और पटाखे प्रतिबंधित
धरना, जुलूस और रैली में पेट्रोल, एसिड, केरोसिन जैसे ज्वलनशील पदार्थ का उपयोग करने पर रोक रहेगी। पटाखे और विस्फोटक सामग्री का उपयोग भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। बिना अनुमति टेंट-पंडाल लगाने और सड़क, हाईवे या रास्तों पर यातायात बाधित करने की अनुमति नहीं होगी।
होटल संचालक और मकान मालिकों को निर्देश
होटल, लॉज, धर्मशाला और विश्राम स्थलों में ठहरने वाले बाहरी व्यक्तियों की जानकारी संचालकों को प्रतिदिन संबंधित थाना प्रभारी को लिखित में देनी होगी। इसी तरह मकान मालिकों को अपने यहां रहने वाले किरायेदारों की जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। ऐतिहासिक इमारतों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, न्यायालय, शासकीय कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर बिना अनुमति शूटिंग, वीडियो, रील और फोटोग्राफी भी प्रतिबंधित रहेगी।
वैवाहिक-सामाजिक कार्यो में राहत
प्रशासन द्वारा जारी आदेश में वैवाहिक और सामाजिक संस्कारों कार्यक्रम के लिए राहत दी है।अनुविभागीय दंडाधिकारी अपने क्षेत्र में आवेदन के आधार पर शर्तों सहित कार्यक्रमों की अनुमति दे सकेंगे। शासकीय ड्यूटी पर तैनात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भी आवश्यक वैधानिक छूट रहेगी। आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का 2 माह तक रहेगा सख्त पहरा, धारा 163 लागू