न्यायालय के आदेश पर 4 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ प्रकरण तीन लोगों से एक मकान का सौदा कर ठगे 31 लाख

न्यायालय के आदेश पर 4 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ प्रकरण
तीन लोगों से एक मकान का सौदा कर ठगे 31 लाख
उज्जैन। 6 साल पहले एक मकान का सौदा 3 लोगों से करने के बाद उनके नाम लोन कराकर 31 लाख की राशि अपने पास रखकर धोखाधड़ी करने वाले परिवार के 4 सदस्यों के खिलाफ न्यायालय के आदेश पर माधवनगर थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया है।
माधवनगर थाना प्रभारी राकेश भारती ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर घट्टिया तहसील के ग्राम नई खेड़ी में रहने वाले लोकेन्द्र उर्फ अर्जुन पिता हरिदास बैरागी, हरिदास पिता गंगाराम बैरागी, श्यामाबाई पति हरिदास बैरागी और गोपालदास बैरागी निवासी महिदपुररोड के खिलाफ भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 420 का प्रकरण दर्ज किया गया है। मामले की जांच शुरू कर चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किये जा रहे है। बताया जा रहा है कि चारों ने  2 हजार स्क्वेयर फीट के मकान का सौदा नईखेड़ी में रहने वाले मोहन पिता रतनलाल मालवीय, ग्राम मऊखेड़ी के ओमप्रकाश मेवाड़ा और इंदिरानगर उज्जैन निवासी तुलसी लेखवानी से कर दिया था। आरोपियों ने तीनों को मकान की राशि अलग-अलग बताई थी और ए. यू. स्माल फायनेंस कंपनी से लोन कराकर करीब 31 लाख की राशि भी प्राप्त कर ली थी। थाना प्रभारी के अनुसार धोखाधड़ी का शिकार हुए तीनों लोगों के साथ वर्ष 2019 में सौदा किया गया था। तीनों ने वर्ष 2024 में न्यायालय में परिवाद लगाया था, जहां से आदेश मिलने पर मामले में प्रकरण दर्ज किया गया है।
खुद को बताया था नगर निगम कर्मचारी
धोखाधड़ी के आरोपी  हरिदास बैरागी ने मकान का सौदा पुत्र लोकेन्द्र उर्फ अर्जुनदास के माध्यम से किया था और खुद को नगर निगम का कर्मचारी होना बताया था। मोहन मालवीय को बताया गया था कि मकान 10 लाख में बेचना है, 2-3 साल बाद ही कीमत 20 से 22 लाख हो जायेगी। मोहन मालवीय ने सौदा कर लिया था, लेकिन तीनों पिता-पुत्र और मां ने मिलकर अपने साथी गोपालदास बैरागी के माध्यम से उसका 14.50 लाख का फायनेंस करा दिया था। वहीं तुलसी लेखवानी को अपनी बातों में फंसा कर उससे सौदा कर 11.50 लाख का लोन ए.यू. स्माल फायनेंस से करा दिया था। ओमप्रकाश मेवाड़ा से 5 लाख में सौदा कर लोन पास कराया और सभी की राशि अपने पास रख ली।
लोन किश्त जमा नहीं होने पर चला पता
धोखाधड़ी का शिकार मोहन मालवीय ने बताया कि मकान का सौदा करने के बाद आरोपी लोकेन्द्र उर्फ अर्जुनदास ने कहा था कि उसके माता-पिता उज्जैन में मकान देख रहे है। मकान मिलने पर खाली कर देगें। लेकिन सालभर बाद कोराना महामारी के चलते बात टल गई। लोन की किश्त भी लोकेन्द्र बैरागी का दे रहे थे। लेकिन उसने लोन भी जमा नहीं किया, ना रजिस्ट्री कराई। जानकारी जुटाने पर पता चला कि बैरागी परिवार 2 ओर लोगों से इसी तरह मकान का सौदा कर चुका है।

Share:

संबंधित समाचार

Leave a Comment