सारंगपुर। इंदौर में दूषित पानी से 14 लोगों की मौत के बाद सारंगपुर में भी पेयजल की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। क्योंकि कालीसिंध नदी में भी शहर से निकलने वाले गंदे नालों का पानी जीवन दायिनी कालीसिंध में छोडा जा रहा है। जो इस तरफ इशारा करता हैं कि पेयजल में प्रदूषण की मात्रा बढ़ रही है। हजारों घरों में जल सप्लाई करने वाली नपा खुद भी इस पानी पर भरोसा नहीं करती। नगर पालिका कार्यालय सहित सभी सरकारी विभागों में आरओ या कैंपर का पानी ही पीने के लिए उपयोग होता है। नगर पालिका की सभी शाखाओं में रोजाना दर्जनभर से अधिक पानी के कैंपर मंगाए जाते हैं। शहर की बात करें तो कपिलेश्वर बांध से हर दिन लाखों लीटर पानी की सप्लाई होती है। इंदौर के भागीरथपुरा की घटना के बाद हमने गंदे पानी को लेकर नगर पालिका सीएमओ ज्योति सुनहरे से चर्चा की तो उनका कहना था कि फिलहाल नगर पालिका ने सभी वाल्व मैन को निर्देश दिए हैं कि गंदा पानी सप्लाई होने की जानकारी तुरंत दें। मोहल्लों से समय-समय पर सैंपल लिए जाएंगे। ताकि लोगों के घर साफ पानी पहुंच सके।
पानी कैंपर की गुणवत्ता पर भी उठ रहे सवाल
शहर के अधिकांश क्षेत्रों में संचालित हो रहे निजी वाटर सप्लाई प्लांट पर नियम कायदों को दरकिनार कर दिया जाता है। यहां तक कि यहां पर्याप्त साफ सफाई भी नहीं होती। ऐसे में जो पानी घरों व दफ्तरों में कैम्पर द्वारा सप्लाई किया जा रहा है वो कितना सुरक्षित है इसकी जांच पडताल करने वाला कोई नहीं है। यहां तक कि कई प्लांट की हालत तो इतना खराब है कि यहां गंदगी का ढेर लगा रहता है। ऐसे में इन निजी प्लांटो के पानी की गुणवत्ता पर भी सवाल उठना लाजमी है। विशेषज्ञों की माने तो नगर में बिकने वाले बोतलबंद पानी जितना पुराना होता जाता है, उसमें एंटीमनी की मात्रा उतनी ही बढती जाती है। अगर यह रसायन किसी व्यक्ति के शरीर में जाता है, तो उसे जी मिचलाने, उल्टी और डायरिया जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे साफ है कि बोतलबंद पानी शुद्धता और स्वच्छता का दावा चाहे जितना करें लेकिन वह सेहत की दृष्टि से सही नहीं है।
खुद के फिल्टर प्लांट के पानी पर भरोसा नहीं, कैंपर का पानी पीते नपा में अधिकारी-कर्मचारी