उज्जैन। हाल ही में किसान संघ ने अपनी समस्याओं के निदान के लिए कलेक्टोरेट पर अनिश्चितकालीन धरना दिया था। प्रारंभिक दौर में समस्या निदान होने तक धरना स्थल पर ही दाल बाटी बनाकर खाने और वहीं रहने की बात कही गई थी लेकिन दिन ढलते –ढलते तीन दिन का आश्वासन मिला और उसके बाद 3 दिन का मामला टलते-टलते 13 दिन पर पहुंच गया है।
उज्जैन सहित कुछ जिलों में किसानों ने बीमा सहित अन्य प्रमुख समस्याओं के साथ ही स्थानीय समस्याओं को लेकर बीते माह के अंतिम सप्ताह में अनिश्चितकालीन धरना दिया था। किसानों की मुख्य मांग बीमा से संबंधित है। भारतीय किसाना संघ के बैनर तले उज्जैन के सिंहस्थ मेला कार्यालय के बाहर जिले के किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना दिया था। इसमें सैंकडों किसान जिले भर से शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री के नाम प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन दिया गया था। जिसमें प्रमुख एवं स्थानीय स्तर की मांगों का ज्ञापन शामिल थी। धरना वाले दिन शाम को पहले सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को बुलाया गया था और बाद में समस्याओं के निराकरण के लिए 3 दिन का समय दिया गया था जिस पर किसान संघ के नेताओं ने सहमति दी थी।
बैठक समय पर हुई पर निदान टला-
किसान संघ से जुडे नेता बताते हैं कि तीन दिन के समय में बराबर किसान प्रतिनिधियों की बैठक कलेक्टर के साथ हुई थी। इसमें जिले के प्रमुख विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे। अहम मसला बीमा कंपनी से संबंधित था लेकिन उसकी और से ही कोई अधिकारी इसमें नहीं था। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर बैठक को एक पखवाडा में 15 सितंबर तक रखते हुए इसमें प्रदेश स्तर यानिकी भोपाल से बीमा कंपनी के बडे अधिकारियों को बुलाने की बात रखी गई थी।
3 दिन से 13 दिन पर आ गया मामला-
किसानों ने 24 अगस्त को अनिश्चितकालीन धरना दिया था। भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में यह धरना देते हुए पूरे जोश खरोश से जिले के किसान प्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं को बुलाया गया था। अनिश्चितकालीन धरना उसी शाम को 3 दिन के आश्वासन पर समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद मामला अब भी वहीं का वहीं है और 13 दिन बाद पर टल गया है।
बीमा संबंधित ये थी प्रमुख मांग-
- उज्जैन जिले की सभी तहसीलों के गावों में खरीफ 2025 की सोयाबीन फसल खराब हुई थी। सर्वे भी प्रशासन ने तहसील स्तर पर दल गठित कर करवाया था । रिपोर्ट के आधार पर जिले में बीमा रशि भी प्राप्त हुई । लेकिन कई ऐसे गांवों को जहां नुकसान हुआ था उन्हें बीमा राशि से वंचित कर दिया गया।
- फसल के नुकसान के लिए सैटेलाईट डाटा को आधार मानकर क्लेम देने की पद्धति पर तुरंत रोक लगाई जाए।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का कार्यालय तहसील स्तर पर हो एवं यहां जवाबदार कर्मचारी नियुक्त किया जाए।
- जिले की सभी तहसीलों में जहाँ सिंचाई की कमी है ऐसे गांव में नर्मदा सिचाई पाईप लाईन विछाई जाए।