उज्जैन। शहर में एक बार फिर जलसंकट की आशंका गहराने लगी है। मुख्य पेयजल स्रोत गंभीर डैम में अब महज लगभग 60 दिनों का पानी शेष रह गया है। लगातार बढ़ती गर्मी, अधिक खपत और तेज वाष्पीकरण के कारण जलस्तर तेजी से घट रहा है, जिससे आने वाले महीनों में स्थिति चिंताजनक हो सकती है।
जानकारी के अनुसार वर्तमान में गंभीर डैम का जलस्तर लगभग 546 एमसीएफटी दर्ज किया गया है। वहीं प्रतिदिन 9 से 10 एमसीएफटी पानी की खपत हो रही है। इस हिसाब से उपलब्ध पानी अप्रैल, मई और जून तक ही पेयजल आपूर्ति के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। यदि जुलाई तक पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो शहर में जल संकट की स्थिति बन सकती है।
पिछले कुछ वर्षों का अनुभव भी चिंता बढ़ाने वाला रहा है। लगभग हर वर्ष गंभीर डैम गर्मियों में सूखने की कगार पर पहुंच जाता है और शहरवासियों को बारिश का इंतजार करना पड़ता है। बीते वर्ष भी डैम मुश्किल से भर पाया था और अंतिम समय में हुई बारिश से ही स्थिति संभल सकी थी। इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही बनते नजर आ रहे हैं।
इस वर्ष तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिससे पानी का वाष्पीकरण तेजी से होगा। इसके साथ ही शहर की बढ़ती आबादी के कारण पानी की मांग भी लगातार बढ़ रही है। यदि यही स्थिति बनी रही और मानसून समय पर नहीं आया तो जल वितरण व्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा और एक दिन छोड़कर जलप्रदाय जैसी व्यवस्था लागू करनी पड़ सकती है।
नगर निगम और जल विभाग के सामने चुनौती है कि सीमित संसाधनों में शहर की जरूरतों को पूरा किया जाए। साथ ही नागरिकों से भी अपील की जा रही है कि वे पानी का उपयोग सोच-समझकर करें और अनावश्यक बर्बादी से बचें। वर्षा जल संचयन जैसे विकल्पों को अपनाने की भी आवश्यकता बताई जा रही है। समय रहते सतर्कता और योजनाबद्ध प्रबंधन नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में उज्जैन को गंभीर जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है।