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उज्जैन। दिन में पड़ रही भीषण गर्मी के बाद अब रात का न्यूनतम तापमान भी रिकार्ड तोड़ने पर आतूर दिखाई दे रहा है। सोमवार-मंगलवार रात न्यूनतम 26 डिग्री दर्ज किया गया है। इस सीजन में 25 अप्रैल को अधिकतम तापमान पांच साल बाद 43 डिग्री दर्ज हुआ है।
अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में बारिश, ओलावृष्टि से मौसम बदला हुआ था और तापमान 35 डिग्री के आसपास बना हुआ था। लेकिन 20 अप्रैल के बाद तापमान में तेजी आना शुरू हो गई। 40 डिग्री के आसपास पहुंच चुके अधिकतम तापमान ने 25 अप्रैल को 43 डिग्री पर दस्तक दी। जो पिछले पांच सालों में सबसे अधिक होना सामने आया। अधिकतम में आई तेजी के साथ रात का न्यूनतम पारा भी गति पकड़ने लगा है। 27-28 अप्रैल की रात न्यूनतम 26 डिग्री दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे अधिक रहा। जीवाजीराव वेधशाला अधीक्षक डॉ. राजेन्द्र कुमार गुप्त के अनुसार इससे पहले न्यूनतम तापमान 21 अप्रैल 2022 को 27. 5 डिग्री पहुंचा था। दिन-रात के तापमान में आ रही तेजी के साथ आम जनजीवन अब पूरी तरह से प्रभावित दिखाई देने लगा है। जिस दिन में चैन नहीं मिल रहा है, वहीं रात भी बैचेन भरी हो गई है। कूलर की हवा भी दम तोड़ती दिखाई दे रही है। अब सिर्फ एसी से ही राहत महसूस की जा रही है। मौसम विभाग की माने तो आगामी दिनों में दिन-रात का तापमान ओर बढ़ सकता है। इस बीच मौसम में बदलाव का नजारा भी दिखाई देगा।
12 कि.मी. की रफ्ता से चल रही हवा
25 अप्रैल को 43 डिग्री पहुंचे तापमान के बाद हवा की रफ्तार 12 किलोमीटर प्रतिघंटे की हो गई है। मंगलवार को हवा की रफ्तार 12 किलोमीटर की थी। जिसक चलते अधिकतम तापमान 41 डिग्री दर्ज किया गया। मंगलवार सुबह आर्द्रता का प्रतिशत 51 और शाम को 21 प्रतिशत रहा। दिन में चल रही हवा पश्चिमी दिशा की ओर से आ रही थी। जिसमें गर्माहाट महसूस हो रही थी। शाम ढलने के बाद गर्मी के साथ उमस बढ़ गई थी। गर्मी से शादी-समारोह के साथ व्यापार व्यवसाय भी प्रभावित हो गया था।
गर्मी को लेकर मछली पालकों को चेताया
मत्स्य पालन विभाग ने निजी एवं समस्त मत्स्य पालकों को अर्लट करते कहा कि अप्रैल 2026 में मध्यप्रदेश भीषण गर्मी और हीट वेव (लू) की चपेट में है, तापमान 45 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। तापमान में परिवर्तन से भीषण गर्मी (हीट वेव) के दौरान तालाबों का तापमान बढ़ने और आॅक्सीजन कम होने से मछलियों के मरने का खतरा बढ़ जाता है। सहायक संचालक मत्स्य पालन के अनुसार इन परिस्थितियों में मछलियों को हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए पालक गर्मियों में तालाब की नियमित निगरानी करें। यदि मछलियां पानी की सतह पर आकर सांस लेती हुई दिखें, तो यह आॅक्सीजन की कमी का संकेत है। तुरंत ताजे पानी का प्रवाह बढ़ाएं। मछलियों का खान-पान और गतिविधि का ध्यान रखें। तालाब में लगातार पानी भरते रहें, ताकि जलस्तर ५ से ६ फीट तक बना रहे। गहराई होने से पानी जल्दी गर्म नहीं होता। सुबह-शाम पास के सबमर्सिबल पंप या ट्यूबवेल से ताजा ठंडा पानी डालें, जिससे घुली हुई आॅक्सीजन की मात्रा बनी रहे।
पिछले ५ वर्ष में ऐसा रहा अप्रेल-
वर्ष अधिकतम वर्ष न्यूनतम
२९.०४.२१ ४२.० २४.०४.२१ २३.०
०९.०४.२२ ४२.२ २१.०४.२२ २७.५
१८.०४.२३ ४०.० २६.०४.२३ २५.०
१८.०४.२४ ४०.५ १९.०४.२४ २४.०
१८.०४.२५ ४२.८ २९.०४.२५ २७.०
२५.०४.२६ ४३.० २८.०४.२६ २६.०
स्त्रोत-शासकीय जीवाजी वेधशाला,उज्जैन। नोट- आंकडे डिग्री सेंटीग्रेड में है।