वन विभाग के साथ सैंकडों ग्रामीणों ने मशक्कत की,पकडी गई 4 नीलगाय

उज्जैन। वन विभाग के साथ सैंकडों ग्रामीणों ने शुक्रवार तडके जमकर मशक्कत की है,हालांकि इस दौरान बोमा में मात्र 4 नीलगाय ही पकडी जा सकी है। पकडी गई नीलगायों को अभी यहीं रखा गया है। अगले एक दो दिन आपरेशन को ठंडा रखा जाना है। उसके बाद एक बार फिर से आपरेशन को अंजाम दिया जाएगा।शुक्रवार तडके बृजराजखेडी के आसपास के करीब 5 गांवों के ग्रामीणों ने वन विभाग के साथ मिलकर अलग-अलग दल के रूप में आपरेशन में शामिल हुए थे। एसडीओ विक्रमसिंह सोलंकी के अनुसार करीब 300 ग्रामीण हांका में शामिल हुए। इसके अलावा 50 से अधिक बाईक सवार भी थे। एक साथ सभी ने हांका लगाते हुए नीलगायों को घेरने की मशक्कत की । इस दौरान झूंड के रूप में नीलगायों ने खुले खेतों में उलटी और दौड लगा दी। मात्र 4 नीलगाय ही हांका दल के घेरने में आई और बोमा में समा गई।7-8 किलोमीटर दूर भागी- क्षेत्र में मौजूद नीलगाय पिछले कुछ समय से झूंड के रूप में थी। शुक्रवार सुबह के आपरेशन के बाद नीलगायें बोमा की उल्टी दिशा में 7-8 किलोमीटर दूर भाग गई है। उन्हें वापस लाना भी अब मशक्कत का काम बन गया है। बकौल एसडीओ श्री सोलंकी ग्रामीणों से चर्चा के दौरान सामने आया कि उन्हें अमरूद पसंद हैं अधिकांश वे इनके खेतों में ही झूंड बनाकर रहते देखी जाती है। यहीं नहीं उनकी पसंद के पत्ते एवं हरी घांस से उन्हें वापस क्षेत्र में लाया जाएगा।ये कारण होने से कम गाय पकडी गई-श्री सोलंकी के अनुसार क्षेत्र में सपाट खेत हैं। वृक्ष गिनती के हैं। इसके चलते खेतों में बोमा के पर्दे लगे देखकर पहले से ही नीलगाय दूर रह रही हैं। वृक्ष नहीं होने से उन्हें बाधा नहीं मिल रही है और वे सपाट खेतों में दौड रही हैं। एक बार पून: सभी बिंदुओं पर विचार किया जा रहा है। पूरी परिस्थिति का रिव्यू किया जा रहा है। विशेषज्ञों से परामर्श किया जा रहा है । नीलगायों को बोमा में लाने के अन्य विकल्प भी देखे जा रहे हैं।

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