बाजार में जिसका सबसे ज्यादा संकट था वह 1-2-5 के सिक्के बहुतायत में उपलब्ध हुए धुम्रपान की कालाबाजारी में चिल्लर चल पडी -ग्राहकों का चाकलेट से मुक्ति मिली, मुनाफे के मुद्दे पर सिक्के चलन में वापस लौटे

 

उज्जैन। धुम्रपान उत्पाद पर सरकार का कर बढने से पहले ही बाजार में इनके दाम में 20-25 प्रतिशत बढोतरी हो गई है। कालाबाजारियों की शातिरी के तहत ऐसा हो रहा है। इससे बाजार में एक फायदा हो गया है जो चिल्लर बाजार से गायब थी और 1-2 रूपए के स्थान पर उपभोक्ता को चाकलेट पकडाने का काम बंद हो गया है। बाजार में जमकर सिक्के चलन में आ गए हैं। यहां तक की नोट लेकर सिक्के दिए जा रहे हैं।

धुम्रपान उत्पादों में सिगरेट की कालाबाजारी का दौर बाजार में चल रहा है। इसके तहत सरकारी कर बढने से पहले ही बाजार में दाम बढा दिए गए हैं। फूटकर व्यवसायी बताते हैं कि अव्वल माल की शार्टेज बताई जा रही है उस पर उंचे दाम में माल बाजार में मिल रहा है। ऐसे में थोक से लेकर खेरची तक पर इसका प्रभाव पडा है। सामान्य रूप से सिगरेटों पर 20-25 प्रतिशत दाम उंचे लिए जा रहे हैं। इसके चलते चिल्लर का चलन बाजार में एक बार फिर से शुरू हो गया है।

10 की सिगरेट 12 में –

अमूमन पूरे बाजार में ही पिछले 5-6 दिनों में मुनाफाखोरों की  नई दर सरकार से पहले ही लागू हो गई है। खुदरा विक्रेता कहते हैं इसमें10 रूपए वाली सिगरेट सीधे 12 रूपए में दी जा रही है। खास बात यह है कि इस सौदे में अगर ग्राहक 20 रूपए का नोट देता है तो उसे वापसी में 8 रूपए 1,2एवं 5 के सिक्के के रूप में दिए जा रहे हैं,जबकि इस दाम वृद्धि से पहले बाजार में 1-2 रूपए के सिकके के स्थान पर खुदरा व्यापारी ग्राहकों को चाकलेट पकडा रहे थे और चिल्लर का संकट बता रहे थे।

एक दम इतनी चिल्लर चलन में-

धुम्रपान उत्पाद पर गैर कानूनी रूप से दर वृद्धि के इस दौर में खास तो यह है कि पूरे बाजार में ही खुदरा व्यापारियों के पास जमकर चिल्लर इन्हीं दिनों में आई है। इससे कई सवाल जन्म ले रहे हैं। पिछले 5-6 दिनों से पहले शहर में 1-2-5 रूपए के सिक्के मिलना मुश्किल हो रहा था। खुदरा व्यापारी इसके लिए ग्राहक से खुल्ले पैसे मांगते थे और नहीं होने पर कई बार ही नहीं अमूमन ज्यादा समय सिक्के के बदल चाकलेट पकडा रहे थे। बाजार में एक दम बडे पैमाने पर आई चिल्लर जमाखोरी या फिर किसी गडबड की शंका को जन्म दे रही है।

अभी तो बैंकों से भी जारी नहीं हुई –

इधर सूत्रों का  कहना है कि हाल ही के दिनों में स्थानीय स्तर पर किसी बैंक ने भी इतनी बडी मात्रा में चिल्लर के रूप में 1-2-5 रूपए के सिक्के बाजार में चलन के लिए निकाले हों। ऐसे में बाजार में जमकर आए सिकके या तो पूर्व में जमाखोरों के पास थे या फिर इन्हें विशेष प्रयोजनों के तहत इसी तरह की मुनाफाखोरी के लिए कालाबाजारियों ने पूर्व से ही जमा कर रखा था।

आशंकाएं जन्म ले रही-

खुदरा व्यापारियों को चिल्लर के रूप में सिक्के भी उपलबध करवाए जा रहे हैं। इससे खुले को लेकर चिक-चिक नहीं होने एवं दाम में विवाद होने के मामलों पर ब्रेक लगा रहने की बात कही जा रही है। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि दाम में मुनाफाखोरी के लिए पूर्व से ही इस पूरे मामले की तैयारी कालाबाजारियों ने कर रखी थी।

 

 

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