टेक होम राशन व्यवस्था पर आर्थिक संकट मंडरा रहा, पोषण आहार प्लांट चलाने की जिम्मेदारी महिलाओं का दी थी

उज्जैन। चाहे उज्जैन हो या फिर पूरा प्रदेश ही क्यों न हो जो जानकारी प्राप्त हो रही है उसके अनुसार 1200 करोड़ रुपए की टेक होम राशन व्यवस्था पर आर्थिक संकट मंडरा रहा है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य ने सरकार ने प्रदेश में पोषण आहार प्लांट चलाने की जिम्मेदारी महिलाओं का दी थी।

लेकिन निरंतर घाटे के कारण पोषण आहार प्लांट पर आर्थिक संकट इस कदर मंडराया है कि ये करीब तीन महीने से बंद पड़े हैं। सरकार का कहना है कि समूहों द्वारा संचालित सातों प्लांट सालाना 40-50 करोड़ रुपए का नुकसान उठा रहे हैं और पिछले 4 वर्षों में कुल घाटा 300 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। यह भी तर्क दिया जा रहा है कि मौजूदा प्लांट समय पर सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं, जिससे हितग्राहियों तक राशन पहुंचाने में दो-दो महीने की देरी हो रही है। इसका असर यह हुआ है कि इसमें काम करने वाली महिलाएं अब मजदूरी करने को मजबूर हैं। गौरतलब है कि मंडला, सागर, नर्मदापुरम, देवास, धार, रीवा और शिवपुरी में 141 करोड़ रुपए की लागत से 7 प्लांट स्थापित किए थे। अब सवाल उठ रहा है कि इन प्लांटों में काम कर रही लगभग 5 लाख महिलाओं की आजीविका का क्या होगा? क्या लखपति दीदी बनाने का वादा करने वाली सरकार उनसे रोजगार छीन लेगी? इस पूरी प्रशासनिक खींचतान का सबसे दुखद पहलू यह है कि योजना अपने मूल उद्देश्य में ही विफल होती दिख रही है। सरकार पोषण आहार पर सालाना 1200 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर रही है, लेकिन बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के बजाय गिरावट देखी जा रही है।

जानकारी के अनुसार, महंगाई बढ़ने के कारण पोषण आहार प्लांट का घाटा बढ़ा है। वर्ष 2018-19 में छोटे बच्चों के लिए दिए जाने वाले राशन का दाम 8 रुपए और महिलाओं व किशोरियों को दिए जाने वाले राशन के लिए 9.50 रुपए दाम तय किए थे। यानी यदि स्वसहायता 10 करोड़ का माल तैयार करते थे तो सरकार 8 करोड़ देती थी। इससे करीब 2 करोड़ रुपए का घाटा इसमें हो रहा था। यह लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि सरकार ने रेट नहीं बढ़ाए। हाल ही में 12 रुपए रेट किए हैं, लेकिन अभी यह मिलना शुरू नहीं हुआ। प्लांट बंद होने की बड़ी वजह यह है कि इन प्लांट पर जो सामग्री प्राइवेट सप्लायर भेज रहे थे, उन्होंने सप्लाई रोक दी है और कहा है कि पहले पुराना पैसा दो। जानकारी के अनुसार 7 प्लांट के ऊपर करीब 300 करोड़ रुपए की उधारी हो गई है। इस राशि का भुगतान करने के लिए मार्च महीने में कैबिनेट के लिए पंचायत विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन वह कैबिनेट में जा नहीं सका। इसमें लिखा गया था कि सातों प्लांट को करीब 239 करोड़ रुपए की हानि हुई है, जो अब तक बढकऱ 300 करोड़ हो गई। जानकारी के अनुसार देवास प्लांट में 55.68 करोड़, धार प्लांट में 50.70 करोड़ , नर्मदापुरम प्लांट में 23.25 करोड़ , रीवा प्लांट में 35.70 करोड़ , मंडला प्लांट में 46.17 करोड़ , सागर प्लांट में 49.48 करोड़ , शिवपुरी प्लांट में  40.30 करोड़  का घाटा हुआ है।

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