खुसूर-फुसूर
धर्मनगरी में नैतिकता पर सवाल…बमुश्किल धर्म नगरी में धंधा चला है। दुकानदारों को काम के साथ दाम मिला है। श्रम को भी स्थान मिला है। श्रमिकों के घरों में चुल्हे पर अब कढाही चढने लगी है। बाबा की कृपा हर तरफ से श्रद्धालु के रूप में बरस रही है। जमकर भगत आ रहे हैं और धर्म नगरी में खर्च कर रहे हैं। पानी की बोतल बेचने वाला भी ईमान का कमा-खा रहा है। इस सबसे परे कुछ लोग चंद दिनों में ही धर्म के सहारे धर्मनगरी में नैतिकता को ताक पर रखकर अर्थलोलूपता में अंधे हुए जा रहे हैं। पूर्व में बाबा के मंदिर में कई मामले ऐसे सामने आए जिसमें दर्शन के नाम पर जमकर श्रद्धालुओं को लूटा गया।तडके की आरती के नाम पर जमकर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की जेब काटी गई। अति होने पर कई मामले वर्दी तक पहुंचे और उसके बाद उपर वाले की लाठी से आवाज नहीं आई दंड जरूर मिला। बाबा के कोतवाल के यहां भी इसी प्रकार नैतिकता को ताक पर रखकर बहुत कुछ किया जा रहा है। पूर्व में यहां कुछ लोग अवैध रूप से मदिरा बेचते थे । मनमाफिक पैसा वसूला जाता था। एक बार मदिरा वाले विभाग की रेड के दौरान हमले का मामला भी हुआ था। हालिया स्थिति में भी नैतिकता को ताक में रखकर श्रद्धालुओं को अवैध रूप से यहां प्रवेश करवाने एवं दर्शन करवाने के मामले में कुछ लोगों को पकडा गया है। खुसूर-फुसूर है कि बाहरी व्यक्ति कैसे श्रद्धा स्थल की व्यवस्था में सेंध मार लेता है और उसकी इतनी पकड हो जाती है कि वह बेकडोर से श्रद्धालुओं को इंट्री करवा देता है। सवालों पर सवाल जन्म लेते हैं। श्रद्धा स्थल की व्यवस्था में सेंध की स्थिति तभी बनती है जब कोई जयचंद होता है। यही कारण होता है कि मिलीभगत से ऐसे मामलों को अंजाम दिया जाता है। इस मामले में भी मिलीभगत वाले जयचंद को तलाश कर उन्हें भी सबक सिखाना ही होगा,अन्यथा मात्र 9 पर कार्रवाई से कुछ नहीं होगा कल 18 इस काम में शामिल दिखाई देंगे और परसों इनकी संख्या 36 पर पहुंचेगी। जब तक श्रद्धा स्थल समिति व्यवस्था में शामिल घून पर वार नहीं करेगी तब तक यह क्रम बंद होने वाला नहीं है।