सारंगपुर। श्रद्धा, परंपरा और सामाजिक समरसता के संगम के साथ अखिल भारतीय क्षत्रिय राजपूत सरदार समाज का भव्य सामूहिक विवाह सम्मेलन सोमवा रात्रि को संपन्ना हुआ। माँ बिजासन के पावन धाम भैंसवा माता में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में 45 वर-वधुओं ने हिंदू वैदिक रीति-रिवाजों के साथ सात फेरे लेकर अपने दांपत्य जीवन की शुरूआत की।
सम्मेलन समिति के निर्णय अनुसार इस वर्ष मुख्य सम्मेलन भैंसवामाता की पावन स्थली पर ही आयोजित करने का संकल्प लिया गया था। एक ही विशाल पांडाल के नीचे आमूनी-सामूनी, तोरण और फेरों की रस्में पूरी की गईं। अग्नि को साक्षी मानकर और वेद मंत्रों की गूंज के बीच नव-युगलों ने एक-दूसरे का हाथ थामा। समिति द्वारा सभी दूल्हों का तिलक लगाकर और अमूनी-सामूनी की रस्म अदा कर भव्य स्वागत किया गया।
समाज की मान्यता है कि माँ बिजासन कुल की देवी हैं और क्षेत्र का कोई भी मांगलिक कार्य माता के नाम की पाती (आमंत्रण/ आशीर्वाद) के बिना शुरू नहीं होता। ऐसी मान्यता है कि माता हर विघ्न-बाधा को हर लेती हैं। परंपरा का निर्वहन करते हुए, सभी जोडों ने सबसे पहले माता के दरबार में मत्था टेका और अपने सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना की। न केवल राजगढ, बल्कि पूरे प्रदेश से श्रद्धालु यहाँ अपनी मन्नातें लेकर आते हैं।
इस मांगलिक अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव सिंह परिहार और ठाकुर चंदर सिंह शामिल हुए। उन्होंने नव-दंपतियों को आशीर्वाद देते हुए समाज की इस एकजुटता की सराहना की।
आयोजन को सफल बनाने में समिति के वरिष्ठ सदस्यों और पदाधिकारियों ने दिन-रात एक कर दिया। जिसमें मुख्य रूप से समिति संस्थापक अध्यक्ष ठाकुर सा. जगन्नााथ सिंह जादौन, धर्मशाला समिति अध्यक्ष जोजन सिंह डाबी, सचिव डॉ. कालू सिंह सोनगरा, सह सचिव कुँवर राजेंद्र सिंह सहित समाज के कई वरिष्ठ जनों और कार्यकतार्ओं का सराहनीय योगदान रहा। इस अवसर पर बडी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे, जिन्होंने वर-वधु पर पुष्प वर्षा कर उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। कार्यक्रम के दौरान संस्थापक जगन्नााथ सिंह जादौन ने कहा कि सामूहिक विवाह के इस आयोजन ने न केवल फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने का संदेश दिया गया बल्कि समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य भी किया है।
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