ईडी की चार्जशीट में बड़ा खुलासा- 127 किलो सोना 102 करोड़ का, देश में तस्करी का आरोप, कन्नड़ अभिनेत्री रान्या राव समेत तीन नामजद

प्रवर्तन निदेशालय ने कन्नड़ अभिनेत्री रान्या राव से जुड़े कथित गोल्ड स्मगलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा खुलासा करते हुए विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल कर दी है। ईडी का दावा है कि मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच एक संगठित सिंडिकेट ने 127.287 किलोग्राम विदेशी सोना भारत में तस्करी कर लाया, जिसकी अनुमानित कीमत 102.55 करोड़ रुपये है। एजेंसी के अनुसार इस पूरे नेटवर्क का संचालन सुनियोजित तरीके से किया गया और अवैध कमाई को हवाला और बैंकिंग चैनलों के जरिए वैध कारोबार के रूप में दिखाने की कोशिश की गई।

ईडी मुख्यालय की जांच इकाई-2 ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत बेंगलुरु की विशेष अदालत में जो चार्जशीट दाखिल की है, उसमें हर्षवर्धिनी रान्या उर्फ रान्या राव, तरुण कोंडुरु और साहिल सकारिया जैन को आरोपी बनाया गया है। एजेंसी का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं बल्कि एक व्यापक और संरचित तस्करी नेटवर्क से जुड़ा है, जिसमें सोने की विदेश में खरीद, भारत में अवैध आयात, घरेलू बाजार में नकद बिक्री और बाद में धन शोधन की बहुस्तरीय प्रक्रिया शामिल थी।

यह जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा 7 मार्च 2025 को दर्ज किए गए एक मामले पर आधारित है। सीबीआई ने यह प्राथमिकी राजस्व खुफिया निदेशालय की शिकायत के आधार पर दर्ज की थी। डीआरआई ने 3 मार्च 2025 को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रान्या राव को दुबई से लौटते समय रोका था। एजेंसी के मुताबिक उनके पास से 14.213 किलोग्राम 24 कैरेट विदेशी मूल का सोना बरामद किया गया, जिसकी कीमत लगभग 12.56 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इसके बाद की गई तलाशी में उनके आवास से 2.67 करोड़ रुपये की अघोषित भारतीय मुद्रा और लगभग 2.06 करोड़ रुपये मूल्य के सोने के आभूषण बरामद किए गए थे। ईडी का कहना है कि यह बरामदगी केवल एक कड़ी थी और आगे की जांच में यह सामने आया कि पिछले एक वर्ष में बड़े पैमाने पर सोने की तस्करी की गई। एजेंसी के बयान के अनुसार तस्करी कर लाया गया सोना देश के विभिन्न हिस्सों में हैंडलरों और ज्वेलरों के नेटवर्क के जरिए बेचा गया। बिक्री से प्राप्त राशि नकद में जुटाई गई और उसे हवाला चैनलों के माध्यम से भारत और विदेशों में समायोजित किया गया। इसके बाद इन पैसों को कई बैंक खातों और फर्जी संस्थाओं के जरिए घुमाकर वैध व्यावसायिक लेन-देन का रूप देने की कोशिश की गई। जांच एजेंसी का कहना है कि इस प्रक्रिया में लेयरिंग और इंटीग्रेशन जैसे मनी लॉन्ड्रिंग के पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया। ईडी ने मई 2025 में इस मामले में छापेमारी भी की थी, जिसमें कई डिजिटल उपकरण, आपत्तिजनक दस्तावेज, भारतीय और विदेशी मुद्रा जब्त की गई। एजेंसी ने कई लोगों के बयान दर्ज किए हैं और वित्तीय लेन-देन के डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया है।

Share:

संबंधित समाचार

Leave a Comment