चौराहे के बीच में लगे सिग्नल हटाकर साइड में किए जाएंगे, 30 करोड़ का आईटीएमएस भी रीडिजाइन होगा
ब्रह्मास्त्र इंदौर
300 करोड़ रुपए की लागत से बने बीआरटीएस सिस्टम के फेल होने पर अब इसे हटाया जा रहा है। वहीं, करीब 30 करोड़ रुपए की लागत से शुरू किया गया इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) भी तय रूप में काम नहीं कर पाया। यह प्रोजेक्ट अब रीडिजाइन किया जाएगा, जिस पर फिर से खर्च होगा।
बीआरटीएस हटाने और एलिवेटेड कॉरिडोर के कारण चौराहे के बीच में लगाए गए सिग्नल हटाकर साइड में किए जाएंगे, ताकि ट्रैफिक की निगरानी और संचालन बेहतर तरीके से हो सके। आईटीएमएस का मकसद एबी रोड पर ट्रैफिक के दबाव को कम करना था, ताकि जाम की स्थिति नहीं बने। स्मार्ट सिटी कंपनी ने शहर के प्रमुख चौराहों पर स्मार्ट सिग्नल और कैमरे लगाए थे, लेकिन तकनीकी और डिजाइन संबंधी खामियों के कारण यह सिस्टम पूरी क्षमता के साथ शुरू ही नहीं हो पाया।
स्मार्ट सिग्नल सिर्फ चालान मशीन बनकर रह गए- आईटीएमएस का मकसद ट्रैफिक के दबाव के अनुसार ग्रीन सिग्नल कंट्रोल करना था, लेकिन ज्यादातर जगह इसका उपयोग सिर्फ ई-चालान बनाने तक सीमित रह गया। कई चौराहों पर सिग्नल की लोकेशन भी बार-बार बदलना पड़ी। प्रोजेक्ट की डेडलाइन दो बार बढ़ाई गई थी। दिसंबर 2025 तक इसे पूरा करना था, लेकिन अब पूरी डिजाइन ही बदलना पड़ रही है। प्रोजेक्ट में 59 चौराहों को लिया था।
आदेश के 1 साल बाद भी बीआरटीएस हटा नहीं सके- बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाने के आदेश हाई कोर्ट ने फरवरी 2025 में दिए थे, लेकिन एक साल बाद भी इसे पूरी तरह हटाया नहीं गया। पांच बार टेंडर निकाले जा चुके हैं। हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब इसे हटाने के काम में तेजी आई है। इसके स्क्रैप का जो आकलन किया गया है, वह भी सवालों के घेरे में रहा। अब आईटीएमएस भी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया, जिससे ट्रैफिक प्रबंधन योजनाओं पर सवाल उठने लगे हैं।