पुराने मटेरियल का उपयोग और लागत भी आधी रह जाती है
उज्जैन। पूरे प्रदेश के साथ ही उज्जैन जिले में भी अब सडक़ निर्माण में हाईटेक सिस्टम का उपयोग शुरू किया जाएगा। यह तकनीक है फुल डेप्थ रिक्लेमिनेशन (एफडीआर)।
इस पद्धति से सड़क निर्माण में आने वाली लागत आधी रह जाती है, जबकि इससे बनी सड़क की मजबूती भी अन्य सड़क की तुलना में दोगुना होती है। इससे अब प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण एफडीआर तकनीक की मदद से किया जाएगा। इस तकनीक से सड़कों का निर्माण करने से यह फायदा होगा कि सडक़ बनाने में पुराने मटेरियल का उपयोग हो जाएगा, निर्माण लागत कम आएगी और समय की बचत होगी।
फुल डेप्थ रिक्लेमेशन एक टिकाऊ और लागत प्रभावी सडक़ पुनर्निर्माण तकनीक है। इसमें मौजूदा डामर और उसके नीचे के बेस/सब-बेस को पूरी गहराई तक पीसकर, सीमेंट या बिटुमिनस इमल्शन जैसे स्टेबलाइजर के साथ मिलाया जाता है, जिससे एक मजबूत बेस तैयार होता है। यह 90 प्रतिशत तक नई सामग्री की जरूरत को कम करता है। इसमें एक ही मशीन के जरिए पुरानी सड़क की सतह (150-300+ एमएम गहराई) को पीसकर उसमें योजक (चूना, सीमेंट, या बिटुमिनस इमल्शन) मिलाकर और फिर उसे कॉम्पैक्ट करके सडक़ को नया आधार दिया जाता है। इसमें पुरानी सामग्रियों का उपयोग होता है, जिससे मलबे को फेंकने और नई सामग्री लाने की जरूरत 90 प्रतिशत तक कम हो जाती है, जो पर्यावरण के लिए बेहतर है। इस तकनीक से निर्माण लागत कम आती है और सड़क अधिक मजबूत होती है। सड़क निर्माण में समय कम लगता है।
जानकारी के अनुसार, नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसका प्लान तैयार कर लिया है। प्रदेश में 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका और 298 नगर परिषद यानी कुल 413 नगरीय निकाय हैं। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक प्रदेश के नगर निगमों से लेकर अन्य नगरीय निकाय भारी-भरकम कर्ज तले दबे हैं। यही वजह है कि नगरीय विकास एवं आवास विभाग स्थानीय निकायों में कम से कम खर्च में विकास कार्य करने के उपाय ढूंढऩे पर काम करता रहता है। इसी कड़ी में शहरी क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण पर खर्च होने वाली राशि में कटौती के लिए फुल डेप्थ रिक्लेमिनेशन तकनीक से सडक़ें बनाने का प्लान बनाया गया है। एफडीआर तकनीक एक रीसाइक्लिंग पद्धति है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई नगरीय निकायों से ये शिकायतें आती हैं कि सीमेंट-कंक्रीट की सडक़ों की ऊंचाई ज्यादा होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मकानों और दुकानों में बारिश का पानी भरने लगता है। वाहन चलाने में मुश्किल होती है। एफडीआर तकनीक से सड़कों की ऊंचाई नहीं बढ़ने से ये समस्याएं सामने नहीं आएंगी।