खुसूर-फुसूर जीवदया के समय में क्रुरता…

खुसूर-फुसूर जीवदया के समय में क्रुरता… गर्मी के भीषण मौसम में इंसान तो जैसे तैसे बच रहा है। उसे ईश्वर प्रदत्त बौद्धिकता मिली हुई है। मूक जीवों के लिए यह दौर बहुत ही कठिन होता है। वे चाहे पशु हों या फिर पक्षी। ऐसे में भी शहरी क्षेत्रों में आवारा जानवरों के साथ क्रुरता की स्थिति बराबर बनी हुई है। दया के दौर में क्रुरता की स्थिति यह है कि जानवरों के पीने के पानी को लेकर मानव प्रबंध की स्थिति नगण्य के समान है। रहवासी क्षेत्रों में लगे हैंडपंप…

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