खुसूर-फुसूर धर्मनगरी में नैतिकता  पर सवाल…

खुसूर-फुसूर धर्मनगरी में नैतिकता  पर सवाल…बमुश्किल धर्म नगरी में धंधा चला है। दुकानदारों को काम के साथ दाम मिला है। श्रम को भी स्थान मिला है। श्रमिकों के घरों में चुल्हे पर अब कढाही चढने लगी है। बाबा की कृपा हर तरफ से श्रद्धालु के रूप में बरस रही है। जमकर भगत आ रहे हैं और धर्म नगरी में खर्च कर रहे हैं। पानी की बोतल बेचने वाला भी ईमान का कमा-खा रहा है। इस सबसे परे कुछ लोग चंद दिनों में ही धर्म के सहारे धर्मनगरी में नैतिकता को…

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