लोहे के पुल स्थित चौराहे पर नाले के चेंबर की जाली टूटी, आए दिन फंस रहे हैं वाहन

रहवासियों ने हादसा ना हो इसलिए इसके ऊपर बैरिकेट्स रखकर ढका

उज्जैन।महाकाल क्षेत्र में लोहे के पुल पर एक नाले के चेंबर की जाली टूटी हुई है जो की दुर्घटना को आमंत्रण दे रही है। लोग हादसे के शिकार ना हो इसलिए रहवासियों ने इस चैंबर को ऊपर बेरिकेट्स रखकर इसे ढक दिया है वाहनों को यहां से निकलने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है कई बार गाड़ी मोड़ते समय पहिया चैंबर की जाल में फंस जाता है रेहवासियों का कहना है कि इसकी शिकायत पार्षद को भी कर दी है। लेकिन अभी तक जाली रिपेयरिंग नहीं की गई है। लोहे के पुल से लेकर नगारची बाखल तक गंदे नाले पर करीब दो दर्जन से अधिक चैंबर बने हैं। चैंबरों को खोलकर ही नाले की सफाई की जाती है बारिश में भी नाले की सफाई के लिए चैंबर खोले गए थे। लेकिन लोहे के पुल के समीप जो चैंबर है उसकी जाली पिछले चार-पांच माह से टूटी पड़ी है। सफाई कर्मचारियों ने इस नाले की सफाई करने के बाद इस चेंबर की जली को ठीक नहीं करवाया। बल्कि टूटी जली को चेंबर के ऊपर रखकर उसे ढक दिया। यह चैंबर बीच सड़क पर है और ऐसे में इसके ऊपर ढकी जाली भी टूटी हुई है। यहां से गुजरने वाले अधिकतर वाहनों को यहां से निकलने में परेशानी होती है। कई बार वाहनों के पहिए इस जाली में फंस चुके हैं आगे कोई हादसा ना हो इसलिए रहवासियों ने इस टूटी जाली के ऊपर बैरिकेट्स रखकर इसे ढक दिया है। रहवासियों का कहना है कि बारिश के समय पानी सड़कों के ऊपर रहता है। ऐसे में और ज्यादा हादसे का खतरा बना रहता है क्योंकि सड़के बारिश के पानी में डूब जाती है इस करण यह टूटी चैंबर की जाली नहीं दिखती और हादसे की आशंका बनी रहती है कई बार इसमें मेजिक सहित अन्य वाहन फंस चुके हैं।

कंट्रोल पर गेहूं लेकर आई गाड़ी भी फसी…

कुछ समय पहले कंट्रोल पर गेहूं की बोरियां उतारने आई खाद्य विभाग की गाड़ी भी इस नाले के चेंबर की जाल में फस गई थी। रहवासियों ने सहयोग कर दो घंटे की मशक्कत के बाद बड़ी मुश्किल से गाड़ी को निकाला । उसके बाद इस टूटी जाली पर बेरिकेट्स रखकर इसे ढका।ताकि आगे कोई हादसा ना हो।

हमेशा लगा रहता है जाम

जिस जगह टूटी जाली चेंबर पर ढकी है वहां हमेशा वाहनों का जाम लगता है लोहे के पुल से तोपखाने पर अधिकतर महाकाल दर्शन इसके लिए आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है यहीं से ऑटो में बैठकर श्रद्धालु आते जाते हैं।

Author: Dainik Awantika