April 15, 2024

इंदौर। विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी रक्षाबंधन, श्रावणी उपाकर्म पर्व को लेकर संशय (भ्रम) की स्थिति बनी हुई है। हिंदू तीज पर्व में एकरूपता लाने के लिए हम सभी को एकजुट होकर मध्यमार्ग अपनाते हुए, धर्म शास्त्रों का अध्ययन करते हुए सही निर्णय लेने हेतु एकजुट होना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य डॉ. मंजू जोशी के अनुसार श्रावणी उपाकर्म पर्व पूर्णिमा तिथि श्रवण नक्षत्र में मनाने का विधान है। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त 2023 प्रातः 11:00 बजे प्रारंभ हो रही है जो कि 31 अगस्त 2023 को प्रातः 7:07 तक रहेगी। 30 अगस्त 2023 को प्रातः10:59 मिनट तक चतुर्दशी तिथि है उसके उपरांत पूर्णिमा तिथि लग रही है पूर्णिमा तिथि लगने के साथ ही भद्रा प्रारंभ हो रहे हैं जो कि रात्रि 9:02 तक रहेंगे। रात्रि काल में जनेऊ धारण, रक्षाबंधन निषेध है इस कारण रक्षाबंधन, उपाकर्म पर्व 31 अगस्त 2023 पूर्णिमा उदय व्यापिनी तिथि में मनाना शास्त्र सम्मत होगा। 31 अगस्त को प्रातः 7:07 तक नूतन जनेऊ धारण करें तदोपरांत रक्षाबंधन पर्व दिनमान सम्पन्न किया जाएगा ।
संशय (भ्रम) की स्थिति उत्पन्न होने पर हमारे धार्मिक ग्रंथों में ऋषियों, मनीषियों, धर्माचार्यों द्वारा समाधान सुझाए गए हैं।

1– एक, मुहूर्त परिमीतम औदयिकी,श्रावणी पूर्णिमा, तिथि
यजुषाम् उपाकर्माय ग्राहया।– ( मनु स्मृति)

2– सवा दो घरिका परिमितम औद्धिकी पूर्णिमा तिथि अनुसार उपाकर्माय , ग्राहया । (निर्णय सिन्धु ,धर्म सिन्धु)
(श्रावण शुक्ल पूर्णिमा तिथि तीन घटिका पांच पला औदायिकी स्थिति को प्राप्त हो रही है। औदायिकी पूर्णिमा तिथि एक मुहूर्त 55 मिनट तथा सवा दो घटिका से अधिक समय को प्राप्त हो रही है। अत: उक्त निर्णयों के आधार पर यजुषाम् श्रावणी उपाकर्म, रक्षाबन्धन का पर्व 31 अगस्त 2023 गुरुवार को मनाना शास्त्र शास्त्र सम्मत रहेगा)
3 – भद्रायां द्वे न कर्तव्य श्रावणी फाल्गुनी तथा।
श्रावणी नृपति हंती ग्रामम दहती फाल्गुनी।। (निर्णय सिंधु)
भद्रा में दो कार्य पूर्ण रूप से निषेध माने गए हैं श्रावणी(रक्षाबंधन)दूसरा, फाल्गुनी(होलिका दहन)
भद्रा में श्रावणी पर्व मनाने से राजा का नाश होता है तथा फाल्गुनी सारे ग्राम का दहन करती हैं।
4– मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार जब चंद्रमा कर्क,कुंभ वो मीन राशि में हो तो भद्रा का वास मृत्युलोक अर्थात पृथ्वी में होता है।-
कुंभकर्कद्वये मृत्ये स्वर्गेज्ब्जेज्जात्रयेऽलिगे।
स्त्रीधनुर्जूकनक्रेऽधो भद्रा तत्रैव तत्फलम्।। ( मुहूर्त चिंतामणि)
भूलोक में जब भद्रा का वास हो उसे शुभकार्यो में त्यागने का शास्त्रों में निर्देश है।
5– स्वर्गे भद्रा शुभं कुर्यात पाताले च धनागम।।
मृत्युलोक स्थिता भद्रा सर्व कार्य विनाशनी।
अर्थात – जब भी पृथ्वी लोक में वास करेगी तब वो विनाशकारी होगी ।
6– *व्रतोपवासस्नानादौ घटिकैकापि या भवैत।
उदये सा तिथिगृह्या विपरिता तु पैतृके।।(निर्णय सिंधु)

उदिते देवतं भानौ पित्रये चास्तमिते रवौ ।
द्विमुहुर्ता त्रिरहवश्च सा तिथि हव्य कव्ययो: ।।
अर्थात सूर्योदय से दो मुहूर्त पर्यन्त जो तिथि हो वो देवकार्य हेतु श्रेष्ठ मानी गई है।
*उल्लेखित तथ्यों के आधार पर 31 अगस्त 2023 दिन गुरुवार को श्रावणी उपाकर्म, रक्षाबंधन पर्व मनाना शास्त्र सम्मत होगा। अतः निसंकोच स्वच्छंद मन से भाई बहन की प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन मनाएं।