April 15, 2024

 

उज्जैन ।  मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.दीपक पिप्पल ने बताया कि प्रदेश में बाल मृत्यु प्रकरणों में कमी लाने के उद्देश्य से दस्तक अभियान संचालित किया जाता है। यह अभियान वर्ष में दो बार (अधिकतम 6 माह तथा न्यूनतम 4 माह के अंतराल में) आयोजित किया जाता है। अभियान के प्रथम चरण में 5 वर्ष की चिकित्सकीय जांच कर बीमारियों की पहचान एवं त्वरित उपचार/प्रबंधन पर बल दिया जाता है।

इसी तारतम्य में वर्ष 2023-24 में दस्तक अभियान के प्रथम चरण का आयोजन 18 जुलाई से किया गया है, जो 31 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान स्वास्थ्य एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी कार्यकर्ताओं के संयुक्त दल द्वारा 5 वर्ष तक के बच्चों के घर-घर जाकर उनकी चिकित्सकीय जांच एवं आवश्यक उपचार/प्रबंधन सुनिश्चित करने हेतु गतिविधियां संचालित की जायेंगी। समुदाय में बीमार नवजातो और बच्चों की पहचान प्रबंधन एवं रेफरल, 5 वर्ष से कम उम्र के गंभीर कुपोषित बच्चों की सक्रिय पहचान रेफरल एवं प्रबंधन, 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों के गंभीर एनीमिया की सक्रिय स्क्रीनिंग एवं प्रबंधन, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में बाल्यकालीन दस्तरोग की पहचान एवं नियंत्रण हेतु ओ.आर.एस. एवं जिंक के उपयोग संबंधी सामुदायिक जागरूकता एवं प्रत्येक घर में गृहभेंट के दौरान ओ.आर.एस. पहुंचाना।

सघन दस्त रोग पखवाड़े में आई.डी.सी.एफ. गतिविधि आयोजन जैसे 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में शैशव एवं बाल्यकालीन निमोनिया की त्वरित पहचान, प्रबंधन एवं रेफरल, 9 माह से 5 वर्ष तक के समस्त बच्चों को विटामिन ए अनुपूरण, बच्चों में दिखाई देने वाली जन्मजात विकृतियों एवं वृद्धि विलंब की पहचान, 5 वर्ष तक की आयु वाले बच्चों मे श्रवणबाधिता एवं दृष्टिदोष की पहचान/पुष्टि कर आर.बी.एस.के. कार्यक्रम में पंजीयन कर उपचारित कराना, समुचित शिशु एवं बाल आहारपूर्ति संबंधी समझाईश समुदाय को देना, एस.एन.सी.यू. एवं एन.आर.सी. से छुट्टी प्राप्त बच्चों मे बीमारी की स्क्रीनिंग तथा फॉलोअप को प्रोत्साहन, गृह भेंट के दौरान आंशिक रूप से टीकाकृत एवं छूटे हुये बच्चों की टीकाकरण स्थिति की जानकारी लेना।