April 19, 2024

उज्जैन। सेंट्रल जेल में कर्मचारियों के जीपीएफ के करीबन 15 करोड़ रुपये के हुए घोटाले में नए तथ्य सामने आ रहे हैं। शनिवार को तेजी से घटे घटनाक्रम में भैरवगढ़ पुलिस ने सेंट्रल जेल अधीक्षक उषा राजे को पूछताछ के लिए थाने ले गई। गौरतलब है कि शुक्रवार शाम को ही उषा राज को जेल अधीक्षक पद से हटाकर जेल मुख्यालय, भोपाल अटैच करने के आदेश जारी किए गए थे। अहम सवाल यह भी है कि उषा राज ने जेल अधीक्षक पद पर रहते हुए अभय तिरवार पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया था। तब सवाल यह उठता है कि क्या ब्लैकमेलर अभय तिरवार को इसका पहले से ही अंदाजा था कि इस तरह का जेल में खेल चल रहा है? यदि ऐसा कोई अंदाजा था या जानकारी थी, तो फिर सवाल यही है कि जिस घोटाले की जानकारी कथित रूप से मैडम को भी नहीं मालूम थी, उसकी जानकारी अभय तिरवार को कहां से लगी ? कौन लोग थे, जिन्होंने उसे इस घोटाले की जानकारी दी? यह शक इसलिए हो रहा है क्योंकि आखिर क्या कारण रहा कि दो लोगों ने मैडम और उनकी बेटी की गाड़ी का पीछा किया? फिर उनमें बहस हुई और मैडम उषा राज ने पुलिस में यह कहते हुए एफआईआर दर्ज करवाई थी कि अभय न्यूज के बताने वाले 2 लोगों ने उनका पीछा किया था और वीडियो बनाया। इस एफआईआर के बाद उषा राज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी ली। उन्होंने कहा कि उनके पास सारे सबूत हैं। मैं डरने वाली नहीं हूं। उषा राज ने बाद में यह भी बताया था कि जेल के कैदियों का अस्पताल में भर्ती होने और उनसे उनके परिजनों के मिलने जुलने को लेकर अभय तिरवार ने उनसे 5 लाख रुपये की मांग की थी। खुद उषा राज के अनुसार अभय तिरवार से उन्होंने कहा था कि यदि अस्पताल मैं कैदियों से उनके परिजन मिल रहे हैं तो इसमें उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती। यह जिम्मेदारी पुलिस की है। उषा राज के अनुसार ही तब अभय तिरवार ने कहा था कि मैं कुछ नहीं जानता। मुझे 5 लाख रुपये दिलवाओ। सवाल यही है कि अस्पताल में भर्ती कैदियों के परिजनों को मिलने जैसी गड़बड़ी इतनी बड़ी भी नहीं है कि उसके लिए अभय तिरवार उषा राज से 5 लाख रुपये जैसी मोटी रकम मांगे? कहीं ऐसा तो नहीं कि घोटालेबाजों के संपर्क में होने से अभय तिरवार को पहले ही इसकी जानकारी लग गई हो? और, वह तत्कालीन जेल अधीक्षक उषा राज से 5 लाख रुपये मांगने पहुंच गया हो। अभय ने जेल में हुए जीपीएफ घोटाले का भय भी दिखाया हो! यह और बात है कि उषा राज ने उसे चवन्नी भी नहीं दी और दोनों के बीच डील फेल हो गई। इसके साथ ही इस मामले में खटास आ गई और मामला बिगड़ता चला गया। अब यह तो अभय तिरवार ही बता सकता है कि इस घोटाले की जानकारी अभय तिरवार को कब और कैसे लगी तथा वह इस मामले में और क्या जानता है? यदि 5 लाख मांगे गए थे तो वह किस संदर्भ में थे?