भैरवगढ सहित खाचरौद एवं अन्य जेलों में दीवार फांदने के मामले पूर्व में हुए हैं विशेष एहतियात के तहत सेंट्रल जेल भैरवगढ की उंची दीवारों की फेंसिंग में करंट छोडा 2016 की दीपावली को भोपाल में हुए मामले पर बरती जा रही है विशेष सतर्कता

उज्जैन। अंग्रेजो के जमाने की भैरवगढ सेंट्रल जेल में दीपावली पर विशेष एहतियात के दौरान की गई सुरक्षा व्यवस्था में परिंदा भी पर मारने में असहाय रहेगा। सुरक्षा के तहत जेल की बडी दीवारों के उपर लगी आधुनिक फेंसिंग में रात के समय करंट छोडने का काम किया जा रहा है। पूर्व में दीवार फांदने के कुछ मामलों के बाद यहां आधुनिक फेंसिंग लगी है जिसमें करंट के तार लगे हैं।जेल अधीक्षक मनोज साहु के अनुसार आधुनिक साधनों के साथ हाईटेक तरीके भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इसके तहत जेल के बाहरी क्षेत्र एवं आंतरिक क्षेत्र के सीसी टीवी कैमरा डोम कैमरा का कंट्रोल रूम से वाच किया जा रहा है। सतत रूप से दिन एवं रात्रि में गश्त जारी है। जेल कर्मियों के अवकाश निरस्त कर दिए गए हैं।बकौल श्री साहूजेल में वर्तमान में संवेदनशील स्तर के करीब 20 ऐसे कैदी हैं जो खतरनाक  की गिनती में हैं और इन पर सतत निगरानी की जाती है। अन्य कैदियों एवं बंदियों से उन्हें अलग ही रखा जाता है। इसी प्रकार से लगभग 20 ऐसे कैदी हैं जिनका शेष प्राकृतिक जीवन जेल में ही बीतना है। एक कैदी फांसी की सजा का है। जेल की 75 बैरक में इन्हें  रखा जा रहा है। जेल की करीब 12-14 फीट उंची दीवारों के उपर आधुनिक फेंसिंग लगी हुई है। रात्रि के समय में सुरक्षा के तहत इसमें करंट का प्रवाह छोडा जाता है। श्री साहू का कहना है कि जेल के अंदर ही नहीं जेल की बाहरी चार दिवारी और कालोनी में भी सतत गश्त की जा रही है। इसके साथ ही जेल के 75 बैरक क्षेत्र में विशेष एहतियात बरती जाकर रात्रि गश्त में जेलर,डिप्टी जेलर स्तर के अधिकारियों की डयूटी अल्टरनेट लगाई जा रही है। यहां तक की रात्रि में आकस्मिक निरीक्षण भी किए जा रहे हैं। इन निरीक्षणों में रात्रि गश्त ,चार दिवारी एवं बाहरी चार दिवारी गश्त को जांचा जा रहा है।गश्त में इंसास एवं थ्री नाट थ्री का उपयोग-जेल अधीक्षक मनोज साहु बताते हैं कि जेल के प्रहरी एवं संतरियों को हथियार प्रदान किए गए हैं। इनमें इंसास स्तर के हथियार शामिल हैं। मुलाकातियों की जांच की जा रही है। जेल खुफिया विभाग को अलर्ट रखा जा रहा है। रात्रि के समय में भैरवगढ थाना पुलिस की गश्त के साथ एफआरवी भी जेल के आसपास ही सतत रूप से चक्कर लगाती है। जेल में लगभग ढाई हजार से अधिक कैदी एवं बंदी वर्तमान में हैं। जेल में अंडा सेल भी है जो संवेदनशील कैदी नियंत्रणहीन आचरण करते हैं उन्हें ऐसे अवसरों पर इन सेलों में बंद किया जाता है। जेल मेन्यूअल के तहत ही ये कार्रवाई की जाती है। दीपावली पर प्रति वर्ष एहतियाती स्तर पर इस प्रकार की कार्रवाई करना होता है।2016 में दीपावली पर प्रदेश में हुआ था मामला-जेल मुख्यालय ने प्रदेश की सभी जेलों को सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखने के निर्देश दिए हैं और कर्मचारियों की छुट्टियां निरस्त कर दी गई हैं। जेल महानिदेशक ने 7 से 9 नवंबर के बीच पड़ने वाले धनतेरस, दीपावली और भाईदूज को देखते हुए एक दिन पहले से सतर्क रहने को कहा है। निर्देश के मुताबिक रातभर कम से कम एक वरिष्ठ अधिकारी जेल परिसर में मौजूद रहेगा और सुरक्षा की निगरानी करेगा। जेल अधीक्षक और उप अधीक्षक भी समय-समय पर निरीक्षण करेंगे। महानिदेशक ने त्योहार खत्म होने के बाद भी सतर्कता बनाए रखने के लिए कहा है। भोपाल सेंट्रल जेल से 31 अक्टूबर 2016 को दीपावली की रात 8 सिमी आतंकी फरार हो गए थे। वे जेल की दीवार फांदकर भागे थे और भागने से पहले उन्होंने एक प्रधान आरक्षक की हत्या की थी। भोपाल के बाहरी इलाके में पुलिस ने मुठभेड़ में सभी आतंकियों को मार गिराया था। इस घटना के बाद से हर साल विशेष सतर्कता बरती जाती है।

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