। कार्बाइड गन बनाम अंधत्व का सामान खरीदने जैसा ही है। इसके अंदर का रसायन आंखों को सबसे पहले प्रभावित करता है। दीपावली के उत्साह में अंधत्व का सामान खरीदने की भूल कदापि नहीं की जाना चाहिए

उज्जैन। कार्बाइड गन बनाम अंधत्व का सामान खरीदने जैसा ही है। इसके अंदर का रसायन आंखों को सबसे पहले प्रभावित करता है। दीपावली के उत्साह में अंधत्व का सामान खरीदने की भूल कदापि नहीं की जाना चाहिए। डाक्टर इसे केमिकल बम मानते हैं सामान्य पटाखा नहीं। वर्ष 2025 में ही उज्जैन जिले में कार्बाइड गन से होने वाले नुकसान के 15 प्रकरण सामने आए थे। प्रदेश में उज्जैन जिला 5 वें स्थान पर था। इस बार प्रतिबंध के चलते मैदान में पुलिस एवं प्रशासन सजग है और बाले-बाले कार्बाइड गन बेचने वाले। इसके बाद भी लोग मात्र 150-200 रु, ऑनलाइन 500-2000 रु में इसे खरीद कर मुसीबत मौल लेने को तैयार हैं।

कभी चायना डोर मकर संक्रांति का मजा किरकिरा कर रही है तो कभी दीपावली में कार्बाइड गन उत्सव में जहर घोल रही है। आधुनिकता से त्यौहारों में विकृतियों का समावेश होता जा रहा है और उत्सव पर दुर्घटनाओं की स्थिति आम होने लगी है। इसी को देखते हुए हाल ही में एक बार फिर से कार्बाइड गन पर प्रतिबंध लगाया गया है। विगत वर्ष उज्जैन के 15 मामलों में से ज्यादातर में  7 से 15 साल के बच्चे शामिल थे, जिनकी आंख और चेहरे पर बर्न इंजरी हुई थी। इंदौर के एम वाय हॉस्पिटल में भी उज्जैन के किशोरों का इलाज हुआ था। दिवाली 2026 से पहले उज्जैन पुलिस ने इसे लेकर चेकिंग शुरू कर दी है और रूख भी सख्त अपनाया हुआ है।क्या हैं कार्बाइड गन-कार्बाइड गन क्या है और कैसे काम करती है?ये मूलतः खेत में पक्षी और जानवर भगाने के लिए बनी है। किसानों के उपयोग की थी। खेतों से ऐसे पक्षी और जानवरों को इससे आवाज कर भगाया जाता है जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। पिछले कुछ सालों से दीपावली त्योहार में खिलौने के तौर पर बिक रही है।इसे पटाखा गन, पाइप गन भी कहते हैं। इसकी बनावट PVC प्लास्टिक या लोहे की पाइप, पीछे गैस लाइटर का स्पार्क सिस्टम, आगे छोटा चैरासायनिक प्रक्रिया पर काम करती है-यह पूरी तरह से रासायनिक प्रक्रिया पर काम करती है। इसमें कैल्शियम कार्बाइड + पानी = एसिटिलीन गैस + चूना बनता है। बंद पाइप में एसिटिलीन गैस भर जाती है, लाइटर से चिंगारी लगते ही जोरदार धमाका, तेज रोशनी और शॉकवेव निकलती है। पाइप फटने पर प्लास्टिक/लोहे के टुकड़े छर्रे की तरह चेहरे पर लगते हैं।इसलिए लगाया गया प्रदेश में प्रतिबंध-मध्यप्रदेश में कार्बाइड गन का चलन  2023-24 से ही सामने आ गया था। इसके बाद भी यह बराबर बाजार में धडल्ले से विक्रय की जा रही थी। दिवाली 2025 में इससे होने वाले हादसों में एक दम से वृद्धि दर्ज की गई। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, विदिशा, जबलपुर में एक साथ सैकड़ों केस दर्ज किए गए। सरकारी आंकड़ों में  लगभग 300 लोग घायल, 186 केस अकेले भोपाल में, 56 ग्वालियर में, 50से अधिक विदिशा में, 31 लोगों की आंख में गंभीर चोट इंदौर में, 15 लोगों की सर्जरी AIIMS भोपाल में हुई। इनमें ज्यादातर 3 से 14 साल के बच्चे आहत होना सामने आया ।अक्टूबर 2025 में बीएनएनएस की धारा 163 के तहत इस प्रदेश व्यापी बैन लगाया गया। इसके  बनाना, रखना, बेचना, खरीदना, दिखाना, इस्तेमाल करना और सोशल मीडिया पर वीडियो डालना – सब पर FIR और 1 साल जेल के साथ रूपए 5 हजार आर्थिक जुर्माना का प्रावधान किया गया। अब दिवाली 2026 से पहले फिर से सख्ती के आदेश हैं।कई को अंधा बना दिया गन ने-2023 स्टडी में खरगोन में 5 युवकों की आंख खराब होने का जिक्र था।2025 दिवाली – MP में 300 घायल, 23 से 30 बच्चों में स्थायी अंधेपन का खतरा, 14 बच्चे पूरी तरह दृष्टिहीन हुए।डाक्टरों के अनुसार केमिकल बम-डॉक्टर इसे सीधे तौर पर  इसे “केमिकल बम कहते हैं वे इसे दीपावली पर उपयोग में आने वाला पटाखा नहीं” मानते हैं। डाक्टरों के अनुसार कैल्शियम कार्बाइड के कण कॉर्निया पर चिपक कर केमिकल बर्न करते हैं। इससे आंखों का लिंबल स्टेम सेल डैमेज, कॉर्निया जलना, रेटिना फटना, स्थायी अंधापन जैसी स्थिति निर्मित होने की स्थिति बन जाती है। कई बच्चों को कॉर्निया ट्रांसप्लांट या एमनियोटिक मेम्ब्रेन ग्राफ्ट लगाना पड़ा। चेहरे एवं त्वचा पर तेज गर्मी से डीप बर्न, प्लास्टिक के टुकड़ों से चेहरे पर छेद जैसी स्थिति बन सकती है। एसिटिलीन गैस और कार्बाइड डस्ट से चक्कर, उल्टी, घुटन, स्किन अल्सर, आंखों में जलन होना सामान्य स्थिति है। इस गन के हाथ में फटने से उंगलियां टूटना, कान के पर्दे फटना भी पूर्व घायलों में देखा गया है।सरकार सख्त, पर ऑनलाइन बिक्री -दिवाली पर कार्बाइड गन पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इससे पूर्व भी ऑफलाइन , ऑनलाइन बैन लगा हुआ था , लेकिन अब ये फिर से ऑनलाइन पेस्ट-कंट्रोल डिवाइस / दूसरे नाम से लिस्ट होकर बिक रही हैं, होम डिलीवरी का दावा भी है। जिले में पुलिस सभी थानों को पटाखा दुकानों, रिहायशी इलाकों में अवैध भंडारण की रोजाना चेकिंग के निर्देश दिए हैं। इसी के तहत बडनगर में पटाखों की जब्ती का मामला सामने आया। पुलिस की सीधी चेतावनी है कि इसे बनाना, बेचना, स्टोर करना, इस्तेमाल करना – सब प्रतिबंधित है। यहां तक की फैब्रिकेशन यूनिट, हार्डवेयर शॉप, कैल्शियम कार्बाइड बेचने वालों पर भी नजर रखी जा रही है।सोशल मीडिया / ऑनलाइन मार्केटप्लेस / वेयरहाउस मॉनिटरिंग सभी रडार पर हैं। गुप्त रूप से भी इन पर नजर रखी जा रही है।

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