खुसूर-फुसूर
संख्या देख यंत्रियों को डकार आई…
मंदिर में हुए बडे आयोजन के दौरान जमकर श्रद्धालु उमडे थे। संयोग अंतर्गत श्रद्धालुओं के उमडने का सिलसिला पूरे 3 दिन निरंतर चलता रहा । लाखों की संख्या में भगवान के दर्शनों को श्रद्धालु आए और शहर में जमकर व्यवसाय चला।ई-रिक्शा वालों ने एक किलोमीटर के 300-500 रूपए तक कमाए हैं।सर्प पूजा वाले दिन तो जमकर कमाई का हाल रहा है। मंदिर में कमाई हुई तो बाहर वालों का कहना था हम भी कमाई करने आए हैं। इस सबसे परे 24 घंटों उपरांत दर्शनों की संख्या का आंकडा जो सामने आया है उसे लेकर पिछले दो दिनों से यंत्रियों को बार-बार डकार आ रही है। उन्हें उल्टी करने का मन करने लगा है। ये एकाध नहीं कुछ ज्यादा जगह के यंत्री हैं । इनमें से एक जगह तो वो है जहां निर्माण की टेस्टिंग कर जांच रिपोर्ट दी जाती है। बात ही बात में वे 12 लाख का जिक्र करने से नहीं चुकते हैं और धीरे से इस पर बातों में सवाल उठाते हैं। लंबाई गूना चौडाई का हिसाब बनाते हैं और फिर चौंकाते हैं। ये कैसे संभव हुआ और किस तरह से हुआ। हर फार्मूला यहां आकर फैल हो रहा है। फिर 12 लाख की संख्या पर आते हैं और उन्हें डकार आने लगती है। वे सीधे बोलते हैं 24 घंटे में कुल 86400 सेकंड होते हैं। ब्रिज कुल 91 फीट लंबा और चौड़ाई: 10 फीट – 5 फीट आने, 5 फीट जाने की। इसकी क्षमता के अनुसार एक बार में 400 श्रद्धालु आ सकते हैं। पूल की मजबूती के लिए 5 स्तंभ का सहारा है। अब 12 लाख के लिए पूल की स्थिति को देखते हुए प्रति सेकंड 13 श्रद्धालुओं का दर्शन करना आवश्यक है। जब आने और जाने का रास्ता एक बार में 5-5 यानिकी कुल 10 का ही रास्ता है तो 13 के दर्शन कैसे हो गए। इस सवाल के उपजते ही यंत्रियों ने एक के बाद एक गणितज्ञों के फार्मूला खोले एवं पिछले तीन दिन से हिसाब लगा रहे हैं पर एक भी फार्मूला के तहत 24 घंटे यानिकी 86400 सेकंड में उक्त स्थान पर 12 लाख के दर्शनों का गणित उनके समक्ष में नहीं आ रहा है। खुसूर-फुसूर है कि बेवजह ही यंत्रियों ने अपना दिमाग खपाया और गणित लगाया । इसमें किसी भी प्रमेय और किसी बीज गणित,अंक गणित,की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए दो और दो पांच करने वाला पहाडा आना चाहिए वो सिर्फ सत्यवादियों के यहां ही मिल सकता है। यही नहीं विकास के दौर में ही मिल सकता है। टेस्टिंग रिपोर्ट में ही एक समय में 300 से ज्यादा श्रद्धालुओं को नही आने देने की स्थिति स्पष्ट थी तो फिर तो नया सवाल खडा हो गया है कि अधिक संख्या को ब्रिज पर लाकर श्रद्धालुओं की जान के साथ खिलवाड करने से भी जिम्मेदार नहीं चूके हैं।