सरकारी योजनाओं से वंचित संत-पुजारी समाज, सुरक्षा और मानदेय बढ़ाने के लिए ‘प्रोटेक्शन एक्ट’ की मांग

बड़नगर। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा किसानों के लिए कई जन कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका लाभ आम किसानों को मिल रहा है। लेकिन दूसरी ओर, मठ-मंदिरों की भूमि पर खेती का कार्य करने वाले संत-पुजारी आज भी इन सरकारी योजनाओं के लाभ से पूरी तरह वंचित हैं। मंदिर की भूमि पर ई-केवाईसी नहीं होने के कारण पुजारियों को खाद-बीज के टोकन नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे उन्हें कृषि कार्य में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिसको लेकर अ.भा. संत समिति धर्म समाज पुजारी ईकाई द्वारा एक ज्ञापन नायब तहसीलदार पूनमसिंह बघेल टप्पा खरसौद कलां को सौपा गया ।
ज्ञापन के माध्यम से धर्मसमाज प्रदेश अध्यक्ष सालगरामदास ने बताया कि जिस प्रकार आम किसानों की फार्मर आईडी बनी हुई है, उसी तर्ज पर शासन द्वारा संचालित मंदिरों के पुजारियों की भी ‘किसान फार्मर आईडी’ बनाई जाए। साथ ही उन्हें सहकारी संस्थाओं का सदस्य बनाकर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ दिलाया जाए। पुजारियों का कहना है कि देवस्थानों के पुजारियों की समस्याओं के निराकरण और प्रशासन से बेहतर तालमेल के लिए अनुविभागीय अधिकारी एवं तहसीलदार द्वारा वर्ष में कम से कम दो बार बैठक ली जानी चाहिए। इससे पूरे मध्य प्रदेश के संत-पुजारी अपनी समस्याओं से अधिकारियों को अवगत करा सकेंगे, वहीं प्रशासन के पास भी मठ-मंदिरों की संपत्तियों की सही और अद्यतन जानकारी उपलब्ध रहेगी। पुजारी समाज ने चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान में लगभग 75 प्रतिशत मंदिरों की जमीनों पर भू-माफियाओं और पड़ोसियों द्वारा अवैध कब्जे कर लिए गए हैं, जिससे मंदिर की जमीनें खुर्द-बुर्द हो रही हैं।
तहसील सहित पूरे प्रदेश में सन 2023 से पुजारी ‘यूनिक कोड’ को लेकर परेशान हो रहे हैं। कई बार आवेदन देने के बावजूद यूनिक कोड जारी नहीं होने से बड़ी संख्या में पुजारियों का मानदेय अटका हुआ है। इसके साथ ही, आए दिन संतों और पुजारियों पर होने वाले हमलों और दबंगों के अत्याचार पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। पुजारियों ने सरकार से सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाते हुए ‘पुजारी प्रोटेक्शन एक्ट’ (पुजारी सुरक्षा कानून) लागू करने की मांग की है।

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