उज्जैन। अधिकमास में शहर के 84 महादेव मंदिरों,नो नारायण मंदिरों एवं सप्तसागर के आजू-बाजू श्रद्धालुओं को परेशान होते देखा जा रहा है। खासकर महिला श्रद्धालुओं को। इन धर्मस्थलों के आसपास लघुशंका स्थलों पर ताले लगे हुए हैं और धर्म मास में घाट पर कपडे बदलने के लाले हैं। 84 महादेव मंदिरों के आसपास पक्के अतिक्रमण किए गए हैं। श्रद्धालु को सिर्फ दुधारू गाय बना दिया गया है। मंदिर से जुडी सुविधा के उपयोग का हकदार नहीं ऐसे हाल बना दिए गए हैं।
धार्मिक मास का अंतिम दौर चल रहा है। इस दौरान श्रद्धालु बडी ही तन्यमता के साथ अपने धर्म-कर्म में लगे हुए हैं। ऐसे में मोक्षदायिनी उत्तर वाहिनी शिप्रा के जल में स्नान ,दीप दान एवं भगवान के दर्शनों के लिए श्रद्धालु बडी संख्या में पहुच रहे हैं।
घाट पर कपडे बदलने के लाले-
शिप्रा तट रामघाट पर तडके से ही बडी संख्या में महिला श्रद्धालुओं का जुटना शुरू हो जाता है।स्नान के उपरांत महिलाओं के कपडे बदलने के लिए यहां रखे चेंजिंग रूम में ताले लगे हुए हैं। लघुशंका स्थल को बंद कर दिया गया है। घाट के सामने उपर दुदेश्वर महादेव के पास के हिस्से में पूजा करवाई जाती है जिससे की वहां भी महिलाएं वस्त्र बदलने नहीं जा पाती हैं। ऐसे में मात्र कुछ पर्दे की आड में ही महिलाओं,युवतियों को वस्त्र बदलने होते हैं या फिर उन्हें गिले वस्त्रों में ही अपना पूजन –पाट पूर्ण करना होता है। उपर के हिस्से में ही दुदेश्वर महादेव की बाजू में निर्माण के वेस्ट मटेरियल एवं गंदगी का ढेर लगा हुआ है।
मंदिरों के लघुशंका स्थलों पर ताले-
रामघाट से उपर की और हरसिद्धि के पीछे वाले मार्ग पर स्थिति 84 महादेव में से एक के पूजन के लिए बडी संख्या में महिलाएं जुटती हैं। यहां पर मंदिर के सामने की और पक्का लघुशंका स्थल बना है लेकिन इस पर ताले लटके हुए होते हैं। इसका व्यक्तिगत उपयोग ही हो रहा है जबकि मार्ग सार्वजनिक है और मंदिर भी । मंदिर में दर्शन कर दान करने वाली श्रद्धालु महिलाओं को भी इस लघुशंका स्थल का उपयोग नहीं करने दिया जाता है।यहां आने वाली महिला श्रद्धालुओं को भी इसका उपयोग नही करने दिया जाता है।
बेरिकेडस गमला बना-
सिंहस्थ में भीड प्रबंधन के उपयोगी बेरिकेडस का बाद में कैसा उपयोग होता है संभवत: आमजन इससे अंजान होगा। नदी किनारे के हिस्सों में बेरिकेडस बेतरतीब हैं। हरसिद्धी मंदिर के पीछे से रामघाट के रास्ते पर जाने के दौरान बेरिकेडस गमला बना दिया गया है। इस गमले में जंगली पौधे पनाह पा रहे हैं।