भीषण गर्मी और रेलवे की लापरवाही: सारंगपुर स्टेशन पर यात्री बूंद-बूंद ठंडे पानी को तरसे

सारंगपुर। सारंगपुर क्षेत्र में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच सारंगपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए पीने के ठंडे पानी का गंभीर संकट खडा हो गया है। आलम यह है कि स्टेशन के नलों से खौलता हुआ गर्म पानी निकल रहा है, जिससे यात्रियों की प्यास बुझने के बजाय परेशानी और बढ़ गई है।
नलों से उबलता पानी
दोपहर के समय स्टेशन के नलों से इतना गर्म पानी आता है कि उसे पीना असंभव है। यात्री मजबूरी में इसी पानी को बोतलों में भर रहे हैं। पूरे प्लेटफार्म पर केवल जो नल लगे है वह यात्रियों की भारी संख्या के आगे नगण्य हैं। कई नालो में पानी तक उपलब्ध नहीं है। रेल आने पर ठंडे पानी के सीमित ठिकानों पर भारी भीड जमा हो रही है। कोटा-इंदौर इंटरसिटी जैसी ट्रेनों के कम स्टॉपेज के कारण पीछे के डिब्बों वाले यात्रियों के लिए पानी तक पहुँचना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
यात्रियों और नागरिकों की मांग
स्थानीय नागरिक अंशुल जैन और यात्री मेहुल कुमार सहित कई लोगों ने रेलवे प्रशासन के प्रति गहरी नाराजगी जताई है और कहा कि प्लेटफार्म पर कम से कम 3-4 अलग-अलग स्थानों पर वाटर कूलर लगाए जाएं। प्रमुख ट्रेनों के आगमन के समय प्लेटफार्म पर चलित ठंडे पानी की ट्रॉली चलाई जाए। पुराने नलों में ठंडे पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब रेलवे यात्रियों से पूरा किराया वसूलता है, तो पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा देना उसकी जिम्मेदारी है। वर्तमान स्थिति में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
नागरिकों ने रखी मांगे
एक तरफ भीषण गर्मी और लू ने लोगों का हाल बेहाल कर रखा है, वहीं दूसरी ओर सारंगपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को ठंडे पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा भी नसीब नहीं हो रही। हालत यह है कि दोपहर के समय स्टेशन पर लगे नलों से गर्म पानी निकल रहा है, जिसे पीने को यात्री मजबूर हैं। स्टेशन पर रोज बडी संख्या में यात्रियों का आवागमन होता है, लेकिन गर्मी के इस मौसम में रेलवे प्रशासन द्वारा पर्याप्त पेयजल व्यवस्था नहीं की गई है। प्लेटफॉर्म पर नाम मात्र के लिए चार-पांच सुराहियां रखी गई हैं, जो यात्रियों की संख्या के मुकाबले बेहद कम साबित हो रही हैं। कई सुराहियों में पानी तक उपलब्ध नहीं रहता। तेज गर्मी और लू के बीच सफर करने वाले यात्रियों को ठंडा पानी नहीं मिलने से परेशानी और बढ गई है।
विजय बारकिया, समाजसेवी
रेलवे स्टेशन पर ठंडे पानी की किल्लत से बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। प्लेटफॉर्म पर ट्रेन का इंतजार करते ठंडे पेयजल की आवश्यकता होती है लेकिन यात्रियों की बढी परेशानी है। इस समय कई बार चक्कर, घबराहट और कमजोरी महसूस होने लगती है। व्यवस्था होनी ही चाहिए।
गोकुल दंडवानी, समाजसेवी,
सारंगपुर स्टेशन पर कोटा इंदौर ट्रेन का बहुत कम समय का स्टॉपेज होता है। ऐसे में पीछे या आगे के डिब्बों में बैठे यात्रियों के लिए प्लेटफॉर्म पर बने प्याऊ तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। कई बार ट्रेन छूटने के डर से यात्री नलों से निकलने वाला गर्म पानी ही बोतलों में भर लेते हैं। यात्रियों ने की अतिरिक्त वाटर प्वाइंट लगाना चाहिए। तीन-चार स्थानों पर ठंडे पानी की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि यात्रियों को एक जगह भीड में नहीं जाना पडे और आसानी से पानी मिल सके।
दीपक प्रजापति, नागरिक, स्थानीय रेलवे स्टेशन पर नागरिकों और यात्रियों के लिए रेलवे प्रशासन के द्वारा कोई ठोस व्यवस्था पेयजल के लिए नहीं की है। जब हम यात्रियों से पूरा किराया लिया जाता है, तो बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराना रेलवे की जिम्मेदारी है। स्टेशन पर जल्द से जल्द पर्याप्त संख्या में वाटर कूलर लगाए जाएं, पुराने नलों में ठंडे पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और प्रमुख ट्रेनों के आगमन के समय प्लेटफॉर्म पर चलित ठंडे पानी की ट्रॉली चलाई जाए।
गोपाल हाड़ा, नागरिक

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