उज्जैन। दो साल के भागीरथ देवासी को बोरवेल से निकालने की दो कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं। रेस्क्यू टीम को उसके हाथों में रोप रिंग पहनाकर बाहर निकालने में सफलता नहीं मिल पाई है। एक बार फिर समानांतर सुरंग बनाई जा रही है। वहीं, बोरिंग में दो अलग-अलग स्तर पर पाइप और रस्सी डालकर उसे निकालने का प्रयास किया जा रहा है।भागीरथ उज्जैन से करीब 75 किलोमीटर दूर बड़नगर के पास झालरिया गांव में 200 फीट गहरे बोरवेल में फंसा है। रेस्क्यू टीम को उसकी नई लोकेशन 45 फीट की गहराई पर मिली है। वह गुरुवार शाम करीब साढ़े 7 बजे बोरवेल में गिरा था। भोपाल से पहुंची NDRF की टीम, हरदा, इंदौर और उज्जैन की SDRF के साथ जॉइंट रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी है।मासूम की मां जत्तू बाई का रो-रोकर बुरा हाल है। वो बार-बार भगवान का नाम ले रही है। कह रही है कि जाने वो कैसा होगा?
भेड़ चराने आया था राजस्थान का परिवार-भागीरथ पिता पूसाराम देवासी, राजस्थान के पाली जिले का रहने वाला है। परिवार इलाके में भेड़ चराने के लिए आया था। परिजन के मुताबिक, बच्चा दीवार के पास खेल रहा था। उसने पत्थर से बोरवेल का ढक्कन हटाया और बाल्टी समझकर पैर डाल दिया, जिससे वह सीधे अंदर गिर गया। मां ने उसे गिरते देखा और बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक वह गहराई में जा चुका था।