एयरपोर्ट पर रन-वे सुधार के लिए रोज रात करीब आठ घंटे का समय मिलता है, लेकिन इसमें से ढाई से तीन घंटे तैयारी और मशीनरी की आवाजाही में ही निकल जाते हैं। एयरपोर्ट पर रात 10.30 बजे तक उड़ानों का संचालन होता है और इसके बाद ही निर्माण एजेंसी को रन-वे सौंपा जाता है। मशीनों की एंट्री, पुराने डामर को हटाने और नई परत बिछाने की प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है।निर्माण कार्य के दौरान पुरानी सतह हटाकर नया बिटुमिन बिछाया जा रहा है। हालांकि मार्च में बढ़ती गर्मी के कारण डामर को पूरी तरह सूखने में अधिक समय लग रहा है और कई बार यह ढीला रह जाता है। इसी समस्या के कारण हाल ही में दिन के समय करीब 20 मिनट के लिए उड़ानों का संचालन रोकना पड़ा था। उस दौरान दिल्ली और रायपुर से आने वाली दो उड़ानों को भोपाल डायवर्ट करना पड़ा।एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार सुबह करीब छह बजे तक रन-वे उड़ानों के लिए तैयार कर दिया जाता है, क्योंकि पहली फ्लाइट सुबह 6.35 बजे से शुरू हो जाती है। हर घंटे रन-वे की तकनीकी जांच की जाती है और पूरी तरह सुरक्षित पाए जाने के बाद ही विमानों को टेकऑफ और लैंडिंग की अनुमति दी जाती है।
रन-वे रिपेयरिंग में गर्मी बनी बाधा:डामर ढीला होने से उड़ानें भी हुई प्रभावित, , रात की फ्लाइटों पर बढ़ा दबाव
इंदौर।देवी अहिल्या बाई होल्कर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रन-वे की रिकार्पेंटिंग और रिपेयरिंग का काम तय समय से करीब तीन महीने पीछे चल रहा है। यह काम फरवरी 2025 में शुरू हुआ था और इसे दिसंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इसे अप्रैल तक पूरा करने का दावा किया जा रहा है। सीमित समय, तकनीकी प्रक्रियाओं और मौसम की बाधाओं के कारण काम की गति धीमी बनी हुई है, जिससे खासकर रात की उड़ानों पर असर पड़ रहा है।