2 करोड़ 88 लाख की लागत होने वाले सौंदरकरण में किया जा रहा घटिया निर्माण

आगर मालवा। नगर पालिका द्वारा शहर को सुंदर बनाने के नाम पर जनता के टैक्स के पैसों की खुली बंदरबांट का एक और गंभीर मामला सामने आया है। ताजा मामला शहर के मध्य स्थित रातड़िया तालाब सौंदर्यकरण कार्य से जुड़ा है, जहां नियमों को ताक पर रखकर बेसाल्ट पत्थर की जगह निम्न स्तर के लाल पत्थर का उपयोग किया जा रहा है। यह पूरा खेल ठेकेदार और नगर पालिका के जिम्मेदारो की मिलीभगत से किया जा रहा है।
गौरतलब है कि 8 अक्टूबर 2025 को संचालनालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास, भोपाल से प्रदीप एस. मिश्रा (प्रमुख अभियंता) द्वारा सभी नगर पालिकाओं को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि जल स्रोतों के आसपास सौंदर्यकरण कार्य में सैंड स्टोन, सेडिमेंटरी रॉक या लाल पत्थर का उपयोग न किया जाए, क्योंकि ये पत्थर हवा के दबाव और बारिश में जल्दी खराब हो जाते हैं। इसके स्थान पर मजबूत व टिकाऊ बेसाल्ट पत्थर के उपयोग के सख्त निर्देश दिए गए थे।
इन स्पष्ट निदेर्शों के बावजूद आगर नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों ने आंख मूंदकर ठेकेदार को घटिया लाल पत्थर लगाने की खुली छूट दे दी। हैरानी की बात यह है कि आदेश जारी होने के तीन महीने बाद भी यहां बड़ी मात्रा में निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है, लेकिन किसी ने न तो आपत्ति की और न ही काम रोका।
नगर पालिका द्वारा रातड़िया तालाब सौंदर्यकरण पर करीब 2 करोड़ 88 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सवाल यह है कि जब राशि करोड़ों में है तो फिर गुणवत्ता में समझौता क्यों? क्या मजबूती की जगह सिर्फ कमीशन और सेटिंग को तरजीह दी जा रही है?
इतना ही नहीं, ठेकेदार द्वारा तालाब की मौजूदा पाल पर ही नया निर्माण किया जा रहा है, जबकि नियमानुसार यहां नींव खोदकर नई दीवार बनाई जानी चाहिए थी। इस गंभीर तकनीकी चूक पर भी नगर पालिका के जिम्मेदारों का ध्यान नहीं गया, जो भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
जब इस मामले में नगर पालिका उटड कुशल सिंह डोडवे से बात की गई तो उन्होंने बेसाल्ट पत्थर संबंधी आदेश की जानकारी न होने की बात कही। यह जवाब अपने आप में कई सवाल खड़े करता है, क्योंकि आदेश को जारी हुए तीन महीने से अधिक समय बीत चुका है और उसी दौरान अधिकांश कार्य भी हो चुका है। लेकिन सवाल यह है कि अब तक जिम्मेदारी किसकी थी? वहीं, इस पूरे मामले पर शहरी विकास अभिकरण अधिकारी मिलिंद ढोके से जब दूरभाष पर संपर्क करना चाहा तो उन्होंने फोन नही उठाया। इसके बाद जब सीएमओ से दूरभाष पर संपर्क करना चाहा तो उन्होंने भी फोन उठान उचित नहीं समझा।
अब बड़ा सवाल यह है की क्या रातड़िया तालाब सौंदर्यकरण वास्तव में शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिए है, या फिर यह ठेकेदारों और अधिकारियों के लिए कमाई का जरिया बन चुका है? अब देखना यह होगा कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या फिर दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई भी होती है।

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