स्नान पर्वों के लिए 2 एमसीएम पानी नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण से ले रहे,संभाले रखना चुनौती

उज्जैन।मार्च के इसी सप्ताह में आने वाले स्नान पर्वों के लिए प्रशासन नर्मदा से दो एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी ले रहा है। यह (70.629 मिलियन क्यूबिक फीट) पानी शहर में 10 दिन तक पेयजल आपूर्ति इतना है। इसी पानी को 12 अप्रैल से शुरू हो रही पंचक्रोशी यात्रा के स्नान के लिए संभाले रखना चुनौती रहेगा।शिप्रा नदी और इसके आसपास कई निर्माण चल रहे हैं, जिनसे पानी गंदा होने का अंदेशा है। इसके पूर्व पर्व स्नान के लिए 14 जनवरी को डेढ़ एमसीएम पानी नर्मदा से लिया था, लेकिन उसे भी साफ नहीं रख पाए। 18-19 मार्च को गुड़ी पड़वा, नवसंवतसर और भूतड़ी अमावस्या के स्नान पर्व हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए शिप्रा के घाटों और कालियादेह महल के 52 कुंड पर आएंगे। लिहाजा प्रशासन नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) से नर्मदा का पानी शिप्रा में ले रहा है। 13 मार्च यानी दो दिन से पाइपलाइन के जरिए पानी ​गऊघाट पर शिप्रा में आ रहा है।इधर, त्रिवेणी के यहां मिट्टी का कच्चा बांध टूटने से कान्ह का गंदा पानी शिप्रा में मिल रहा। साथ ही शिप्रा में पुल निर्माण और नदी के आसपास नए घाटों के निर्माण चल रहे हैं। ऐसे में वर्तमान में नदी में मौजूद पानी काफी दूषित, काला और गंदा है। जिम्मेदारों का तर्क है कि निर्माण वाले कुछ स्थानों पर पाइप डाल दिए गए हैं और कुछ जगह बहाने के लिए रास्ता बनाया है, जिनसे पानी आगे बहता चला जाएगा। हालांकि वे स्वीकारते हैं कि नर्मदा का पानी आने से दो दिन से शिप्रा में जमा गंदा पानी आगे बह रहा है, ये पूरा आगे बह जाएगा। इसके बाद नदी में और कुंड पर साफ पानी जमा हो सकेगा।
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