नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से इस मामले में दखल न देने की अपील की।ACGS (All Creatures Great and Small) नाम की संस्था की तरफ से दलील दे रहे सिंघवी ने कहा कि इस विषय पर कानून और नियम पहले से मौजूद हैं। ऐसे में अदालत का हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। जब संसद जानबूझकर दखल नहीं दे रही है तो वहां अदालत को भी नहीं जाना चाहिए।सिंघवी ने आगे कहा कि एमीकस क्यूरी (अदालत के सलाहकार) अच्छे तो होते हैं लेकिन वे कानून के सलाहकार होते हैं। किसी सब्जेक्ट के एक्सपर्ट नहीं। ऐसे मामलों में डोमेन एक्सपर्ट्स (जैसे पशु, पर्यावरण या स्वास्थ्य विशेषज्ञ) को भी शामिल किया जाना चाहिए।उन्होंने अरावली केस का उदाहरण दिया, जहां पहले बनी समिति में ज्यादातर अफसर थे एक्सपर्ट नहीं। इसी वजह से उस फैसले पर दोबारा विचार करना पड़ा।दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को अरावली पहाड़ियों को लेकर फैसला सुनाया था। उसके अनुसार 100 मीटर से ऊपर की ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही ‘अरावली हिल्स’ माना जाना था। 29 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने अपने फैसले पर रोक लगाते हुए कहा कि पहले एक्सपर्ट राय जरूरी है।
सिंघवी बोले-कुत्तों से जुड़े नियम मौजूद, कोर्ट दखल न दे:सलाह एक्सपर्ट से ही लें; अफसरों की राय के कारण अरावली पर फैसला पलटना पड़ा