श्री महाकालेश्वर के उद्घोषक (चौपदार) श्री महाकाल पाठक की आवाज अनंत कोटि,ब्रम्हाण्ड नायक में समाई

उज्जैन। भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी में आगे-आगे रजत दंड लेकर चलने और सवारी के आने की उद्घोषणा करने वाले चौपदार श्री महाकाल पाठक 63 वर्ष निवासी सिंहपुरी की आवाज अब श्रद्धालुओं को सुनाई नहीं देगी। मंगलवार सुबह स्नान के बाद मंदिर जाने के दौरान उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई, परिजन निजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी अंतिम यात्रा बुधवार सुबह 10.30 बजे सिंहपुरी आताल-पाताल भैरव  के पास से निकाली जाएगी।मार्ग पर सवारी आने के पूर्वअखिल ब्रह्मांड नायक जगाधाधिपति जगदीशवर अनंत कोटी राजराजेश्वर राजाधिराज महाराज महाकालेश्वर महादेव की आवाज लगाने वाले उद्घोषक (चौपदार) श्री महाकाल पाठक की यह आवाज अब श्रद्धालुओं को सूनने को नहीं मिलेगी।राजसी जमाने से पैतृक रूप से  उद्घोषक (चौपदार) रहे श्री महाकाल पाठक नित्य की भां‍ति मंगलवार सुबह उठे और स्नान,पूजन के उपरांत भगवान श्री महाकालेश्वर की आरती में शामिल होने के लिए घर से रवाना हुए थे कि उन्हें सांस लेने में गंभीर समस्या आने पर उन्होंने परिजनों को इसकी जानकारी दी और मुर्छित हो गए थे । उनके जवांई आकाश रावल एवं अन्य परिजन उन्हें तत्काल लेकर इंदौर रोड स्थित निजी अस्पताल पहुंचे थे । अस्पताल में चिकित्सकों ने उनका चेकअप करने के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मंदिर में चौपदार से ही जानते थे- श्री महाकाल पाठक पैतृक रूप से मिली उद्घोषक (चौपदार) की भूमिका का निर्वहन पिछले कई वर्षों से करते आ रहे थे। उनके पितृपुरूषों ने भी स्टेट के जमाने में इसी जिम्मेदारी का निर्वहन किया।63 वर्षीय  श्री पाठक ने वर्षों तक शिक्षक के रूप में समाज में सेवा दी वे तत्कालीन समय में बालकनजी बारी स्कूल में सेवा में रहे। इसके साथ ही वे श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाहरी पुरोहित थे एवं तीर्थ पुरोहित भी थे। श्री महाकालेश्वर मंदिर में उनके पास परंपरागत रूप से उद्घोषक (चौपदार) का पद रहा।बेटा अविवाहित,बेटी विवाहित- श्री पाठक की अल्प आयु में निधन हो गया। वे अपने पीछे एक पुत्र एवं पुत्री छोड गए हैं। कुछ वर्ष पूर्व ही उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह स्थानीय स्तर पर ही किया था। उनके जमाई पं.आकाश रावल के अनुसार वे हार्ट पेशेंट भी थे लेकिन मंगलवार सुबह आकस्मिक रूप से ही उनका स्वास्थ्य गडबडाया और उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई थी।पीढी दरपीढीनिर्वहन- महाकालमंदिर में चौपदार के पद पर रहे पंडित महाकाल पाठक एक विशिष्ट पद से भूषित थे ।इस पद की विशेषता यह है कि भगवान महाकाल के गर्भ ग्रह में चौपदार की वेशभूषा में महाकाल स्तवन के साथ-साथ के उद्घोष का संबोधन किया जाता था। पंडित महाकाल पाठक अपनी कुल परंपरा का निर्वाह करते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर में चौपदार के पद पर अरुढ थे। वर्ष पर्यंत आने वाले त्योहार और सवारी में प्राचीन परंपरा का निर्वाह करते हुए श्री पाठक ने पौराणिक मान्यताओं का अनुसरण किया। जीवन पर्यंत भगवान श्री महाकाल की सेवा की। यह परंपरा उनके परिवार में पीढी दर पीढ़ी चली आ रही है। उनके देवलोक गमन के पश्चात उनके पुत्र पंडित आकाश पाठक इस परंपरा का निर्वहन करेंगे ।

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