ड्यूटी के दौरान गोली चलाने पर अब सीधे FIR नहीं  मध्यप्रदेश में वन कर्मियों को मिला ‘कानूनी कवच’   -पहले मजिस्ट्रियल जांच, फिर सरकार की मंजूरी जरूरी

भोपाल। जंगल और वन्यजीवों की रक्षा करने वाले वन कर्मियों के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार नेआग्नेयास्त्रों के प्रयोग पर विशेष कानूनी संरक्षण देने की अधिसूचना जारी कर दी है। अब ड्यूटी के दौरान गोली चलाने वाले वन अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ पुलिस सीधे FIR दर्ज नहीं कर सकेगी और न ही गिरफ्तारी कर सकेगी। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान W.P.(C) No. 2/2026 और BNSS-2023 की धारा 218(3) के तहत लिया गया है। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।वन विभाग का कहना है कि वनों और वन्यजीवों पर तस्करी, अवैध शिकार और हमलों के खतरे बढ़ गए हैं। ऐसे में वन कर्मियों को हथियारबंद किया गया है। कई बार आत्मरक्षा में गोली चलाने के बाद भी कर्मियों पर ही केस बन जाते थे, जिससे उनका मनोबल गिरता था। इस नए प्रावधान से वन कर्मी बेखौफ होकर कार्रवाई कर सकेंगे और साथ ही गलत इस्तेमाल पर जवाबदेही भी तय होगी।किन्हें मिलेगा संरक्षण-यह सुरक्षा वन विभाग के सभी पदों पर लागू होगी। इसमें शामिल हैं: वनरक्षक, वनपाल, रेंजर, ACF, SDFO, DCF, उप संचालक, DFO, CCF, फील्ड डायरेक्टर और वन-वन्यजीव संरक्षण में लगे अन्य सभी अधिकारी-कर्मचारी।नई प्रक्रिया एक नजर-अनिवार्य मजिस्ट्रियल जांच: आग्नेयास्त्र के प्रयोग की हर घटना की जांच संबंधित क्षेत्र के कार्यपालिक दंडाधिकारी करेंगे।दो शर्तों पर ही FIR: पुलिस कार्रवाई तभी होगी जब – a) जांच में यह निकले कि गोली चलाना अनावश्यक, अनुचित या अत्यधिक था। b) उस जांच रिपोर्ट को राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया हो। राज्य में वन अमले पर बराबर बढते हमलों की स्थिति में अधिकारियों का कहना है कि – “इससे कर्मियों को सुरक्षा भी मिलेगी और पारदर्शिता भी बनी रहेगी।”

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