उज्जैन। लोकसभा में प्रदेश से भाजपा को सभी 29 सीटों पर विजय मिली थी। मध्यप्रदेश एक मात्र ऐसा प्रदेश है जहां से लोकसभा में एक भी विपक्षी नहीं हैं। ऐसे में भाजपा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में मध्य प्रदेश का प्रभाव बढ़ने की प्रबल संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। बिहार में हाल ही में हुए चुनाव में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का भी जादू चला था। अभी तक भाजपा सुप्रीमों टीम में मध्य प्रदेश से संसदीय बोर्ड में अनुसूचित जाति के वरिष्ठ नेता डा.सत्यनारायण जटिया सदस्य हैं। इसके अलावा ओम प्रकाश धुर्वे राष्ट्रीय सचिव और लाल सिंह आर्य अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष हैं।
नए भाजपा सुप्रीमों नितिन नवीन से पार्टी की सियासत में मध्यप्रदेश को अपने प्रभाव के अनुसार वजूद मिलने की प्रबल संभावना है। एक समय थावरचंद गहलोत और नरेंद्र सिंह तोमर दोनों ही राष्ट्रीय महासचिव थे। ऐसे में माना जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में मध्य प्रदेश का भी प्रभाव बढ़ सकता है।
मध्य प्रदेश हमेशा से ही भाजपा के लिए एक प्रयोगशाला की तरह रहा है। हिंदू महासभा हो या जनसंघ, दोनों की जड़ें मध्य प्रदेश में मजबूत रही हैं। यही कारण है कि भाजपा यहां लंबे समय से सत्ता में काबिज है। संगठन की मजबूती की दूसरी वजह यहां के कुशल संगठनकर्ता भी माने जा सकते हैं। कुशाभाऊ ठाकरे, प्यारेलाल खंडेलवाल और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दिग्गज मध्य प्रदेश की राजनीति से ही देशभर में लोकप्रिय हुए। भाजपा के लिए सुरक्षित सीटों में शुमार विदिशा लोकसभा सभा सीट तो ऐसी रही कि वहां से अटल बिहारी वाजपेयी और सुषमा स्वराज जैसे नेताओं को भाजपा ने चुनाव लड़वाया। ये ऐसे कारण हैं, जिसकी वजह से राष्ट्रीय स्तर पर भी संगठन में भाजपा कार्यकर्ताओं का दबदबा रहा है।
प्रदेश से लोकसभा में सभी 29 सीट –
मध्य प्रदेश एक ऐसा राज्य है।जहां से लोकसभा की सभी 29 सीटें 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जीती हैं। अब बड़ी चुनौती इन्हें बरकरार रखने की है। नई सदी में केवल वर्ष 2018 का विधानसभा चुनाव ही ऐसा था, जिसमें भाजपा बहुमत से थोड़ी दूर रह गई थी। अब आने वाले 2028 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सामने चुनौतियां और बढ़ने वाली हैं। ऐसी स्थिति में भाजपा को संगठन को और अधिक मजबूत करना होगा।
विजयवर्गीय सहित 4 शामिल थे-
एक समय पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में मध्य प्रदेश से कैलाश विजयवर्गीय सहित चार नेताओं को स्थान मिला था। इस बार भी चार से पांच नेताओं को नितिन नवीन की टीम में स्थान मिलने की संभावना है। इसमें एक या दो महिलाएं भी शामिल हो सकती हैं। इसके साथ ही युवा नेताओं को भी अवसर मिल सकता है। इसके पूर्व जेपी नड्डा की टीम में कैलाश विजयवर्गीय भी राष्ट्रीय महासचिव हुआ करते थे, लेकिन दो वर्ष पूर्व वह राज्य में मंत्री बना दिए गए। पार्टी नेताओं का मानना है कि चूंकि पूर्व में राष्ट्रीय कमेटी में प्रदेश से दो-दो महासचिव एक साथ रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्तर पर संतुलन बनाने एवं भाजपा के वर्तमान वजूद को बनाए रखने के लिए नवीन की टीम में भी मध्यप्रदेश को पूरा वजूद मिलना तय माना जा रहा है।