इंदौर।254 साल पहले 1771 में देवी अहिल्या द्वारा वाराणसी में निर्मित मणिकर्णिका घाट के एक हिस्से को जमींदोज कर दिया गया है। यहां श्मशान घाट बनाए जाने के प्रोजेक्ट के चलते इसे तोड़ा गया है। इसे लेकर देवी अहिल्या के वंशज और समाज के लोगों में नाराजगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी क्षेत्र से सांसद हैं और उन्होंने 2023 में इसका भूमिपूजन किया था। यहां 18 करोड़ रुपए से विकास कार्य किये जाना है।यहां 29350 वर्ग मीटर एरिया में काम कराया जाना है। यहां मिट्टी दलदली है, इसलिए 15 से 20 मीटर नीचे तक पाइलिंग कराई गई है। सख्त मिट्टी तक पाइलिंग का काम किया गया है। ताकि बाढ़ में यहां के निर्माण को किसी भी तरह की दिक्कत न हो।दरअसल इस घाट की निगरानी देवी अहिल्या की संपत्तियों की देखरेख के लिए बने खासगी देवी अहिल्या बाई होलकर चैरिटीज ट्रस्ट द्वारा किया जाती है। इसके अध्यक्ष यशवंतराव होलकर हैं। उन्होंने इस मामले में बयान जारी कर कहा कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन देवी अहिल्याबाई होलकर की दूरदर्शिता और विरासत को सुरक्षित रखते हुए ही होने चाहिए थे। हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लापरवाही की जांच, दोषियों पर कार्रवाई, मूर्तियां ट्रस्ट को सौंपने और उनके पुनः प्रतिष्ठापन का आग्रह किया है।
वाराणसी में देवी अहिल्या की विरासत जमींदोज:इंदौर में नाराजगी,