उज्जैन। ग्राम पंचायत में निर्माण कार्यो की राशि स्वीकृति के लिये सरपंच से रिश्वत मांगने वाले पंचायत सचिव को लोकायुक्त की टीम ने सोमवार को रंगेहाथ गिरफ्तार किया। सचिव पूर्व में 15 हजार रूपये ले चुका था, उसके द्वारा 45 हजार की मांग की गई थी। सचिव के साथ ठेकेदार भी आरोपी बना है।
12 मार्च को तराना तहसील के ग्राम बोरदा मांडा के सरपंच राजेश चतुर्वेदी द्वारा लोकायुक्त कार्यालय पहुंचकर पुलिस अधीक्षक को शिकायत की गई कि उनके द्वारा ग्राम पंचायत बोरदा मांडा में निर्माण कार्य कराये गये है। जिसकी राशि स्वीकृति के लिये पंचायत सचिव दरबारसिंह राठौड़ ने 45 हजार की रिश्वत मांगी है। 15 हजार रूपये पूर्व में ले चुका है। शिकायत का सत्यापन निरीक्षक दीपक शेजवार को सौंपा गया, जो सही पाया गया। पंचायत सचिव को रंगेहाथ पकड़ने की योजना बनाई गई और उपपुलिस अधीक्षक राजेश पाठक के नेतृत्व में निरीक्षक दीपक शेजवार आरक्षक श्याम शर्मा, संजीव कुमारिया, इसरार, सहायक ग्रेड ३ रमेश डाबर सहित 10 सदस्यों की टीम गठित की गई। सोमवार शाम सरपंच राजेश चतुर्वेदी को रिश्वत की शेष राशि 30 हजार देकर ग्राम पंचायत कार्यालय बोरदा मांडा तराना भेजा गया। जहां पंचायत सचिव दरबारसिंह सरपंच राजेश की कार क्रमांक एमपी 09 सीएच 5873 में बैठ कायथा थाने के पास रोड़ तक आया। लोकायुक्त की टीम भी पीछे-पीछे पहुंची। सचिव ने कार में ही रिश्वत की राशि ली और अपने साथी ठेकेदार कमल बंजारा को दी। पंचायत सचिव के रिश्वत लेते ही लोकायुक्त की टीम पहुंच गई और सचिव के साथ ठेकेदार को कस्टडी में लेकर रिश्वत के लिये रूप में लिये गये 30 हजार जप्त कर लिये।
ठेकेदार को भी बनाया गया आरोपी
निरीक्षक शेजवार ने बताया कि रिश्वत लेते पंचायत सचिव दरबारसिंह राठौड के साथ इेकेदार को भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा में प्रकरण दर्ज किया गया है। रिश्वत लेने की प्रक्रिया के दौरान दोनों के हाथ धुलवाये गये थे, इस दौरान उनके हाथों से रिश्वत का रंग सामने आया है। पंचायत सचिव के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के लिये लोकायुक्त की ओर से पत्र लिखा जायेगा। मामले की विवेचना जल्द पूरी कर विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जायेगा।
बोरदा मांडा के सरपंच से मांगे थे 45 हजार, 15 हजार ले चुका था रिश्वत की राशि 30 हजार लेते पकड़ाया पंचायत सचिव