सुसनेर। नगर में मकर संक्रांति पर्व को लेकर माहौल धीरे-धीरे उल्लासपूर्ण होता जा रहा है। खासकर बच्चों और युवाओं में पतंग उड़ाने को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है।जैसे-जैसे पर्व की तिथि नजदीक आ रही है वैसे-वैसे बाजारों में पतंगों, डोरियों और अन्य संबंधित सामग्री की बिक्री बढ़ने लगी है। नगर के प्रमुख बाजारों, चौक-चौराहों और गली-मोहल्लों में पतंगों की दुकानों पर चहल-पहल दिखाई दे रही है।
मकर संक्रांति पर पतंगबाजी की परंपरा सुसनेर सहित पूरे अंचल में वर्षों से चली आ रही है। इस पर्व पर बच्चे सुबह से ही छतों पर पतंग उड़ाने की तैयारी में जुट जाते हैं। बुजुर्ग भी इस पर्व को सामाजिक मेलजोल और पारंपरिक उल्लास के रूप में मनाते हैं। कई स्थानों पर परिवार एकत्र होकर तिल-गुड़ के व्यंजन बनाते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। इस कारण नगर में पर्व से पहले ही उत्सव जैसा माहौल बन गया है। हालांकि, इस उत्साह के बीच एक गंभीर समस्या भी सामने आ रही है। प्रशासन द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद बाजार में चाइना मांझा बिकने की शिकायतें मिल रही हैं। चाइना मांझा बेहद धारदार होने के कारण जानलेवा साबित हो सकता है। इसके चलते शासन और प्रशासन ने इसकी बिक्री, भंडारण और उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाया हुआ है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कुछ दुकानदार चोरी-छिपे चाइना मांझा बेच रहे हैं जिससे हादसों की आशंका बढ़ गई है। विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मांझा खतरा बन सकता है। वहीं पशु-पक्षी प्रेमियों ने भी इस पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि हर वर्ष इस मांझे के कारण कई पक्षी घायल हो जाते हैं या उनकी मौत हो जाती है। प्रशासन की ओर से समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर आमजन से सुरक्षित सूती मांझे का उपयोग करने की अपील की जा रही है। साथ ही प्रतिबंधित मांझे की बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। नगरवासियों ने भी पर्व को सुरक्षित और आनंदमय बनाने के लिए प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है ताकि मकर संक्रांति का पर्व बिना किसी दुर्घटना के हर्षोल्लास के साथ मनाया जा सके।
प्रशासन की रोक के बाद भी चाइना मांझे की बिक्री से हादसे की आशंका