सारंगपुर। परिवहन विभाग ने पूर्व में बस में हुए गंभीर अपराध के बाद कई कडे निर्णय लिए थे। इनमें बस में महिलाओं सहित अन्य यात्रियों को जरुरी मदद के लिए पैनिक बटन साथ में जीपीएस लगाने का निर्णय भी शामिल था। परिवहन विभाग का दावा है जिले में चलने वाली यात्री बस में पैनिक बटन लगे हुए हैं, जबकि यात्रियों का दावा है उनको कभी नजर ही नहीं आए। इतना ही नहीं बस में जहां आपात हालात होने पर बाहर आने के लिए खिडकी होना जरुरी होता है, वहां खिडकी तो है, लेकिन अंदर सीट लगा रखी है। सडको पर ओवरलोड बस आम बात है तो सारंगपुर में बसों के दरवाजे पर लटककर यात्रा की मजबूरी है। यह परिवहन विभाग को छोडकर सभी को नजर आ रहा है।
जांच पडताल अमला मैदान से गायब
शहर में जर्जर बसों का संचालन धडल्ले से जारी है, जिनके पास फिटनेस, परमिट और बीमा है कि नहीं यह सुनिश्चित और जांचने वाला अमला मैदान से गायब है। रोजाना नया बस स्टैण्ड से आधा सैकडा से अधिक बसें अपने गंतव्य रूप से धड;ल्ले से चल रहीं है। जिनपर निगरानी रखना तो दूर की बात है किसी भी विभाग द्वारा इन्हें रोककर यात्रियों का फीडबैक तक नहीं लिया है। ज्ञात हो कि यात्री बसों में बीते हादसों के बाद प्रदेश स्तर से निर्देश है की सभी यात्री बसों की जांच पडताल की जाए। साथ ही जर्जर बसों पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए है।
सडको पर कंडम बसों की भरमार
सूत्रों की माने तो सारंगपुर से लगे शहरों में आवाजाही करने वाली दर्जन से अधिक बसों की फिजिकल कंडीशन ठीक नहीं है। किसी में आपातकालीन दरवाजे नहीं लगे हैं तो किसी की कुर्सियां इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि सफर के दौरान यात्री एक-दूसरे से टकरा जाते हैं। कुछ बसें पुरानी होने की वजह से उनकी चद्दर और अन्य उपकरण खत्म होने के कगार पर हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा खतरे में रहती है। बसों द्वारा परिवहन विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन नहीं करने के बावजूद इन पर जुमार्ना या चालानी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
इन रूटों पर नियमों का उल्लंघन
संचालित ज्यादातर बसों की फिटनेस संदिग्ध है। इसके बावजूद इनकी जांच नहीं की जा रही है। ऐसे में खिलचीपुर, जीरापुर, शाजापुर, आगर, शुजालपुर, कुरावर जाने वाले रूटों पर नियमों का जमकर उल्लंघन हो रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी उन सवारियों को होती है जो पूरा किराया देकर भी खडे-खडे ही अपना सफर तय करते हैं। बस संचालकों द्वारा सवारियों को होने वाली परेशानियों का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। बस आॅपरेटरो को महज अपने मुनाफे से मतलब है शायद यही कारण है कि स्टाफ अपनी नौकरी बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा सवारियों को बस में बिठा लेते है।
स्कूली बसों की रफ्तार पर भी नियंत्रण नहीं
यात्री बसों के साथ-साथ स्कूली बसों की जांच पडताल भी पर्याप्त संख्या में नहीं की गई है। शुरूआत में कुछ बसों की फिटनेस परखी गई, इनमें से दो बसों को जब्त भी किया गया था। लेकिन अगले ही दिन बसों को अपने हाल पर छोड दिया गया। खास बात यह है कि स्कूली बसों की रफ्तार नियंत्रित होना चाहिए। लेकिन ऐसा होता नहीं है और पीली रंग की स्कूली बसों अनियंत्रित गति से चल रही हैं। जाहिर है इन बसों में बैठे बच्चों का जीवन खतरे में बना रहता है। इस पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। जिसे अब तक नजर अंदाज किया जाता रहा है।
ऐसे काम करता सिस्टम
यात्री बसों में पैनिक बटन लगाना 2022 में अनिवार्य किया गया। इस बटन के साथ ही जीपीएस सिस्टम भी होना चाहिए। जिससे वाहन की लोकेशन का पता चलेगा। बटन को महिला आरक्षित सीटों के पास लगाया जाएगा। व्हीकल लोकेशन सिस्टम से उन यात्री बसों को भी पकडा जा सकेगा, जो तय रूट के अलावा अन्य मार्गों पर दौड रही है। पैनिक बटन दबाते ही वाहन से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी भोपाल स्थित सेंटर को मिल जाएगी। वहां से आस-पास के पुलिस थाना को सूचित किया जाएगा जिसके बाद पुलिस की टीम पहुंचकर वाहन को रोकर रोकर महिला यात्री की मदद करेंगे।