डिजिटल कॉपी जांच की नई व्यवस्था: शिक्षकों को डिजिटल जानकारी की कमी भी खल रही

इंदौर। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा कक्षा 12 की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए शुरू की जा रही डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग व्यवस्था के ट्रायल चरण में इंदौर में कुछ शुरुआती चुनौतियां सामने आई हैं।     ट्रायल के दौरान कई शिक्षकों को कंप्यूटर स्क्रीन पर कॉपी जांचने की प्रक्रिया समझने में अपेक्षा से अधिक समय लगा।      दरअसल, नई व्यवस्था के तहत उत्तरपुस्तिकाओं को स्कैन कर सॉफ्टवेयर के माध्यम से परीक्षकों को उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे स्क्रीन पर ही कॉपी का मूल्यांकन कर सकें। इसके लिए शिक्षकों को सैंपल कॉपियां भेजकर अभ्यास कराया गया।  इस ट्रायल में शिक्षकों को समझने में लगा ज्यादा समयदौरान अनुभवी परीक्षक जहां एक कॉपी 20 से 30 मिनट में जांचने में सफल रहे, वहीं कई शिक्षकों को पहली बार में एक कॉपी जांचने में करीब एक घंटे से लेकर 90 मिनट तक का समय लगा।        कुछ शिक्षकों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के दौरान वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) मिलने में भी देरी का सामना करना पड़ा, हालांकि बाद में सीबीएसई ने दोबारा लॉगिन लिंक भेजकर प्रक्रिया पूरी कराई।      सीबीएसई के अधिकारियों का कहना है कि यह केवल अभ्यास चरण है, जिसका उद्देश्य शिक्षकों को नए डिजिटल सिस्टम से परिचित कराना है।      उनके अनुसार डिजिटल मूल्यांकन से पारदर्शिता बढ़ेगी और अंकों के टोटल में होने वाली त्रुटियों की संभावना भी कम होगी।
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