खुसूर-फुसूर बराबर मिलते रहे भविष्य से …

खुसूर-फुसूर बराबर मिलते रहे भविष्य से … हर बार शैक्षणिक सत्र की शुरूआत में एक परंपरा का निर्वहन हमारी आदत बन चुकी है। पिछले कुछ वर्षों में हमारे सरकारी शैक्षणिक स्थलों में काफी अच्छा सुधार आया है लेकिन अब भी उसे उस स्तर का नहीं कहा जा सकता है जो कि निजी स्कूलों का है। वह जब तक नहीं हो सकता है जब तक की मानसिक एवं आत्मिक रूप से उस जिम्मेदारी का स्वीकार नहीं कर लिया जाता है। तीन दिवसीय आयोजन में तमाम अफसर एवं जनप्रतिनिधियों ने एक दिन…

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