April 20, 2024

व्यापारी को सोयाबीन बेचने गए किसान ने खोली पोल, 40 किलो सोयाबीन की अफरा-तफरी, मंडी के जांचकर्ता पर भी मिलीभगत का आरोप

उज्जैन। व्यापारी किस तरह किसानों की उपज को कम तौल कर माल की अफरा-तफरी कर रहे हैं, किसानों के साथ धोखाधड़ी कर रहे हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं, इसी से जुड़ा हुआ एक मामला सामने आया है। उज्जैन जिले की घट्टिया तहसील के ग्राम पानबड़ोदिया के किसान लाखन कुमावत ने लिखित शिकायत की है कि व्यापारी ने उसके साथ 40 किलो सोयाबीन कम तोलकर अफरा-तफरी कर दी। कृषि उपज मंडी के जांचकर्ता ने भी सबूत को अनदेखा कर व्यापारी पर कोई कार्यवाही नहीं की। कृषक कुमावत ने कहा कि दबाव बनाकर उससे समझौता करवा लिया परंतु अब वह इस मामले को कृषि मंत्री तक ले जाएगा। कुमावत ने यह शिकायत अपर कलेक्टर , थाना चिमनगंज मंडी तथा सचिव कृषि उपज मंडी को लिखित में की है।
कृषक लाखन कुमावत ने शिकायत में कहा है कि वह अपनी कृषि उपज सोयाबीन की ट्राली लेकर आया था। पूर्व में ही उसने धर्मकांटा पर मंडी में तोल करवा लिया था। जिसकी पर्ची भी बनवा ली थी। इस उपज सोयाबीन को निजी ट्रेडर्स ने खरीदा था। इसका भाव तोल चिट्ठी अनुसार 7761 रुपए प्रति क्विंटल पर नीलाम हुई थी। इसके बाद संबंधित फर्म पर मेरी सोयाबीन तोला गया तो उसमें 1 क्विंटल 20 किलो का कम आया। इसका बाजार मूल्य 9313 रुपए होता है। मैंने इसकी शिकायत मंडी कमेटी में की थी, जहां से मंडी कर्मचारी अश्विन पहाड़िया ने ढुलमुल नीति का परिचय देते हुए मेरे द्वारा प्रस्तुत प्रमाण को अनदेखा कर दिया। इसके बाद उक्त व्यापारी फर्म व उसके व्यापारी साथी अश्विन पहाड़िया ने दबाव बनाया और मुझे विवश होकर समझौता करना पड़ा। कुमावत ने दी गई शिकायत में लिखा है कि मेरे जैसे अनेक किसानों के साथ इस प्रकार की हरकत आम बात हो गई है। यह अत्यंत चिंतनीय है। इतना ही नहीं उसी दिन भुगतान का नियम है, जबकि मेरी उपज का भुगतान संबंधित फर्म द्वारा 3 दिन बाद किया गया। इससे समझौते के दौरान संबंधित फर्म ने माल में अंतर बताकर जो 1 क्विंटल 20 किलो था, उसके एवज में 80 किलो का भुगतान किया गया। मेरे द्वारा दबाव में समझौता कर लिया गया। मुझे 80 किलो सोयाबीन का भुगतान किया गया। इसका मतलब यह है कि मेरा आरोप सही था। संबंधित व्यापारी ने मुझे दोषी ठहराने के लिए अन्य व्यापारियों को बोलकर मंडी का व्यापार दूसरे दिन रोक दिया था।जो कि उसकी हठधर्मिता का परिचायक है। सबसे बड़ा आश्चर्य तो इस बात पर है कि मंडी कमेटी ने जांच की तो मेरा आरोप सही पाया। ऐसी स्थिति में संबंधित फर्म को कारण बताओ नोटिस व उसका लाइसेंस क्यों निरस्त नहीं किया गया। कुमावत ने कहा कि वह इस मामले को कृषि मंत्री तक ले जाएगा, चाहे विधि सम्मत कितना ही व्यय क्यों न करना पड़े। मेरी सोयाबीन को कम बताने के बाद भी मंडी प्रशासन सक्रिय नहीं हुआ और व्यापारी पर वरदहस्त बनाए रखा है। उक्त व्यापारी ने मेरी सामाजिक व ग्रामीण प्रतिष्ठा को धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जिसकी वजह से हर एक को यह कहानी की तरह सुनाना पड़ रहा है। लाखन कुमावत ने लोगों से अनुरोध किया है कि मेरी 40 किलो सोयाबीन कहां है? आप तोल पर्ची से निर्धारण करवाएं। पूर्व तोल कांटा की पर्ची एवं व्यापारी द्वारा करवाए गए तोल में 1. 20 क्विंटल का अंतर था। इस तरह 40 किलो सोयाबीन की अफरा-तफरी की गई। जिसकी जांच कर योग्य दंडात्मक कार्यवाही संबंधित के विरुद्ध की जाए। गायब 40 किलो सोयाबीन की जब्ती भी करवाई जाए।