पालयन कर अन्य राज्यों में गए मतदाताओं से प्रशासन को आस लौटेंगे वापस

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सुसनेर। कल 7 मई को लोकसभा चुनाव के लिए सुसनेर विधानसभा में मतदान होना है. चुनाव आयोग राजस्थान की सीमा से लगे हुवें 21 गांवों एवं नाथ संप्रदाय के साथ सुसनेर क्षेत्र के दिहाडी मजदूरी वालें क्षेत्रों में कम मतदान की आशंका है. इसकी वजह है- पलायन. इसी के चलते जिला प्रशासन की तरफ से गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, आध्रप्रदेश आदि राज्यों में रोजगार की तलाश में पलायन कर गए नागरिकों को बुलावा भेजा गया है। बाकायदा कॉल सेंटर बनाकर उन्हें लोकतंत्र के महापर्व में शामिल होने के लिए घर आने का संदेश दे आमंत्रित किया। किंतु इन प्रयासों में सफलता मिले इसकी संभावनाएं बहुत कम है। लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा पलायन का है। रोजगार के मुद्दे पर जिन पार्टियों और प्रत्याशियों ने जीतकर लोकसभा में कदम रखा उन्होंने ही इस मुद्दे को बिसरा दिया। कई दशकों से सुसनेर क्षेत्र के मतदाताओं को स्थायी रोजगार तक नहीं मिल पाया। सुसनेर विधानसभा से प्रतिवर्ष अनुमानित 20 से 25 हजार से अधिक श्रमिक मजदूरी के लिए अन्य राज्यों में पलायन कर जाते हैं। मनरेगा जैसी केंद्र की योजनाओं के अतिरिक्त स्थानीय योजनाएं भी पूरी तरह कारगर साबित नहीं हुई। हालात यह है कि मतदान तारीख में अब एक दिन रह गया और कई गांव खाली पड़े हैं। पलायन कर चुके श्रमिकों का कहना है कि खेती के काम से फुरसत मिलते पर काम की तलाश में दूसरे राज्यों में भटकना पड़ता है।
यहां के 90 प्रतिशत मतदाता अन्य राज्यों में
सुसनेर क्षेत्र के लक्ष्मीपुरा, भवानीपुरा, गणेशपुरा, आकली गांव जहां लगभग 90 प्रतिशत नाथ संप्रदाय के लोग पलायन कर अन्य राज्यों में है। प्रशासन भी यहां के 1000 से अधिक मतदाताओं के पलायन को मान रहा है। लक्ष्मीपुरा निवासी मागुनाथ ने बताया कि समाज के लोग टीकमगढ़, सागर, आध्रप्रदेश, गुजरात है वहां से मतदान के लिए नहीं आएगे। चुनाव से हमारा नहीं, नेताओं का भला होता है। लक्ष्मीपुरा के हरिसिंह ने बताया कि उनके जैसे हजारों लोग अन्य राज्य में है, जहां से वे वोट डालने नहीं आ सकते है। विधानसभा चुनाव में दीपावली की वजह इनके घर पर होने का फायदा मिला था किंतु अब चुनाव मई माह में होने व खेती के काम खत्म होने से बड़ी मात्रा में मजदूर पलायन कर चले गए है।
21 गांवों के 34 मतदान केंद्र लगे है राजस्थान सीमा से
सुसनेर विधानसभा सीमाएं राजस्थान के पिडावा, झालरापाटन, डग के गंगधार से लगी है। यहां के 34 मतदान केंद्रों के मतदाताओं की संख्या 25658 है। इसमें 17 मतदान केंद्र जहां पर 4 हजार से अधिक मतदाता है। यहां के 70 प्रतिशत लोग मजदूरी के लिए राजस्थान,गुजरात गए है। इसके अलावा सुसनेर क्षेत्र में लगने वाले बामनियाखेडी,पालडा आदि गांव के जहां से भी लोग मजदूरी के लिए अन्य राज्यों में गए है। जिस पर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। राजस्थान से लगे मतदान केंद्रों में बराई, किशनपुरा, साल्याखेडी, डोगरगांव, साल्याखेडी, पालडा, लोहारिया, पटपडा, सेमली, गरडा आदि शामिल है।
फसल कटने के बाद कर जाते हैं पलायन
सुसनेर के आसपास के कई गांवों में भी पलायन होता है। कई गांवों में परिवार के परिवार पलायन कर गए है। कई घरों में ताले लटके हैं। वहीं कुछ लोग घर की देखभाल के लिए एक-दो सदस्यों को छोड़ गए हैं। ग्रामीण बताते है फसल कटने के बाद मजदूरी नहीं मिलती है। यही वजह दूसरे राज्यों में काम के तलाश में जाना पड़ता है। ठेकेदार श्रमिकों को अन्य राज्यों में मजदूरी के लिए भेजते हैं। क्षेत्र में सामान्य मजदूरों को 200 से 250 रुपए प्रतिदिन की मजदूरी मिलती है। दूसरे राज्यों में 300 से 500 रुपए प्रतिदिन तक मिल जाता है।