उगते सूर्य को अर्घ्य देकर हुई नव संवत्सर की अगवानी

 

श्रीखंड से कराया मुंह मीठा, गुड़ी बांधी, गुड़ धनिया बांटा

151 फीट ऊंची तक बांधी गई गुड़ी, प्रातः अर्ध्य देने के साथ ही हुए कई सांस्कृतिक आयोजन, माता के कलश की स्थापना के साथ ही नवरात्रि भी शुरू

इंदौर। हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2081 की शुरुआत चैत्र प्रतिपदा पर आज से शुरू हो गई। हिंदू नव वर्ष के आगमन पर लोगों ने घरों में गुड़ी बांधी तथा गुड़ धनिया बांटा गया। आज से नवरात्रि उत्सव भी शुरू हो गया। लोगों ने माता के कलश की स्थापना कर पूजा अर्चना शुरू की। सामूहिक रूप से सूर्य को अर्ध्य देकर कई सांस्कृतिक आयोजन भी जगह-जगह हुए।
ध्यान रहे कि बीते वर्ष में बदले परिदृश्य में अब हर जन के मन में हिंदू नववर्ष का उल्लास छाया हुआ है। इस खास मौके पर एक दर्जन से अधिक स्थानों पर सामूहिक रूप से उगते सूर्य को अर्घ्य देकर नववर्ष की अगवानी की गई। चाणक्यपुरी में 51 फीट तो दशहरा मैदान पर 151 फीट ऊंची गुड़ी बांधी गई। महाराष्ट्रीयन परिवारों में विजय पताका गुड़ी बांधी और श्रीखंड से मुंह मीठा कर नववर्ष की शुभकामनाएं दी जा रही है।
सनातनी मठ मंदिरों में पहुंचकर आराध्य के श्रीचरणों में मत्था टेककर नव संकल्प ले रहे हैं। होलकर राज परिवार के श्रीमंत सरदार उदयसिंहराव होलकर के अनुसार यह परिवर्तन 25 वर्षों में धीरे-धीरे हुआ है। इसका श्रेय उन धार्मिक-सामाजिक और राजनीतिक संगठनों को जाता है, जिन्होंने इसके लिए सतत प्रयास किया।

महिलाओं की ज्यादा भागीदारी

महाराष्ट्र समाज राजेंद्र नगर के अध्यक्ष सुनील धर्माधिकारी बताते हैं कि 20 साल पहले हिंदू नववर्ष के बारे में कम ही लोगों को पता था। हम 11 वर्षों से हिंदू नववर्ष पर कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इसमें अब युवा और महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।

गुलाब जल से धोया जाता था राजवाड़ा

इतिहास के पन्ने खंगालें तो पता चलता है कि राजवंश द्वारा तीन जगह मल्हारी मार्तंड मंदिर, दौलत की गादी और खासी की गादी पर गुड़ी बांधी जाती थी। राज परिवार के निवास पर नवध्वज फहराया जाता था। गुड़ी बांधने की परंपरा आज भी निभाई जा रही है। अब चांदी के बजाय लकड़ी के दंड पर गुड़ी बांधी जाती है। उस वक्त राजवाड़ा को गुलाब जल से धोया जाता था।

राजवाड़ा चौक पर दिया गया अर्ध्य

संस्कार भारती जिला इंदौर, लोक संस्कृति मंच एवं नगर निगम द्वारा राजवाड़ा चौक पर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया गया। बड़ा गणपति चौराहा पर संस्था सार्थक द्वारा शंख ध्वनि और स्वस्तिवाचन के बीच उगते सूर्य को सुबह 6.15 बजे अर्घ्य दिया गया।