‘विनम्रता से ओतप्रोत’ उत्तम मार्दव विनय प्रकाशै

उज्जैन ।  श्री महावीर तपोभूमि पर आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज के आशीर्वाद से जबलपुर से पधारी ब्रह्मचारिणी बहन डॉ. प्रभात दीदी के नेतृत्व में शिविर के दूसरे दिन 10 लक्षण धर्म की पूजा की गई प्रभात दीदी ने आज पर्युषण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म मनाया। एवं प्रभात दीदी ने अपने प्रवचन में कहा कि मार्दव का अर्थ है मृदुता, कोमलता। समस्त आत्माओं में छोटे बड़े की कल्पना से मुक्त होकर समानता का भाव, व्यवहार, व्यवहार से उत्तम मार्दव धर्म है। विनम्रता से ओतप्रोत करता हैं। ‘ उत्तम मार्दव विनय प्रकाशै ‘
उत्तम मार्दव धर्म समस्त आत्माओं में छोटे बडे की कल्पना से मुक्त होकर समानता का भाव, व्यवहार, व्यवहार से उत्तम मार्दव धर्म है। कठोरता कारण वह अपने अलावा किसी अन्य को कुछ नही समझता।
मान महाविषरुप, करहि नीच गति जगत में। मान तो भयंकर जल के समान हैं, जबकि मार्दव ह्रदय कोमलता प्रदान करता है, अपने आप को धर्म में लगाए रखन का मार्ग प्रशस्त करता है। समाज सचिव सचिन कासलीवाल ने बताया कि श्री महावीर तपोभूमि प्रभा दीदी के सानिध्य में 10 लक्षण धर्म की पूजा के साथ-साथ नित नियम की पूजा अभिषेक शांतिधारा ध्यान तत्व चर्चा भगवान की आरती सामायिक पाठ आदि प्रत्येक दिन चल रहा है जिसमें शिविर के साथ साथ शहर के कई धर्मावलंबी लॉक महावीर तपोभूमि पहुंच रहे हैं और बताया कि आज प्रभा दीदी ने अपने प्रवचन में कहा कि शब्दों को हमेशा तोलमोल कर बोलना चाहिए एक शब्द आरती बन जाते हैं तो दूसरा शब्द घाव कर देते हैं जिस प्रकार ककड़ी के मुख्य को काटकर नमक लगाकर उसका कड़वा पन हटाया जाता है उसी प्रकार हमें अपने शब्दों में कड़वापन हटाना चाहिए उत्तम क्षमा धर्म के दिन हमने एक इकाई प्रारंभ की थी उस इकाई के पीछे सुन्नय लगाना अब आपकी संकल्पों में होना चाहिए एक सुन्नय लगाओगे तो 10 हो जाएगा 2 लगाओगे तो सो हो जाएगा वैसे अनेक सुन्नय लगाना होंगे और हमें अपने धर्म को आगे बढ़ाना होगा।

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