सारंगपुर शहर में धड़ल्ले से बिक रहा मिलावटी दूध

सारंगपुर शहर में धड़ल्ले से बिक रहा मिलावटी दूध
सारंगपुर। विगत 2 मार्च को प्रदेशस्तर से प्रशासन को आदेशित किया गया है कि अभियान चलाकर दूध में मिलावट करने वाले और नकली दूध निमार्ताओं पर कार्रवाई करें, बावजूद इसके सारंगपुर क्षेत्र के बाजारों व कस्बों में दूध के नाम पर मिलावटी व सिंथेटिक दूध की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। कई डेरियों में आवक से ज्यादा दूध उत्पादन दिखाकर दूध सप्लाई किया जा रहा है। लोग पैसा खर्च करने के बावजूद न केवल घटिया दूध एवं उससे बने पनीर, मावा का सेवन कर रहे हैं। बल्कि बीमारी को भी निमंत्रण दे रहे है। लोगों को असली नकली का फर्क नहीं रहने का लाभ विक्रेताओं द्वारा उठाया जा रहा है। जो अधिक लाभ कमाने के चक्कर में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। वहीं, खाद्य विभाग की लापरवाही के चलते भी नकली दूध, पनीर व खोवा बेचने का धंधा परवान चढ़ता जा रहा है। दरअसल, सिंथेटिक दूध व उससे बने पनीर व खोवे को देखकर असली व नकली के बीच भेद कर पाना मुश्किल है। मगर, शहर एवं कस्बो की कई नामचीन डेयरियों में छुप-छुप कर इसकी बिक्री जारी है। वहीं, हलवाई की दुकानों पर भी सिंथेटिक दूध का प्रयोग हो रहा है। देखने में सामान्य होने के कारण असली नकली का फर्क करना मुश्किल है तथा लोग असली का मूल्य चुकाकर नकली दूध खरीद घर ले जाने रहे हैं। जबकि पिछले दिनों ही जिले के खैरासी गांव में खाद्य विभाग, प्रशासन और पुलिस की टीम ने दबिश देकर नकली दूध बनाने और खपाने के मामले में पकड़े गए एक आरोपित पर रासुका की कार्रवाई के साथ ही भोपाल सेंट्रल जेल में भेजा है। लेकिन उसके बाद अब क्षेत्र में नकली दूध को पकड़ने की कार्रवाई नहीं की गई।
सिंथेटिक पनीर आमतौर पर केमिकल से तैयार किया जाता है। इसकी लागत मूल्य काफी कम आती है। शुद्ध दूध का पनीर जहां 240 से 260 रुपये प्रति किलो की दर से बिक्री कर पाना मुश्किल है वहीं, सिंथेटिक पनीर 120 से 140 रुपये थोक में आसानी से उपलब्ध हो जाता है। उक्त पनीर को चाट-पकौड़े बेचने वाले से आसानी से खरीद कर रहे हैं। अधिक कमाने के चक्कर में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
कई गांवों में चल रहा नकली दूध बनाने का कारोबार
हम आप को बता दें कि अंचल में एक-दो जगह नहीं बल्कि ज्यादातर गांवों में यह नकली दूध बनाया जा रहा है। इस कारोबार में दूधिया वर्ग भी लिप्त है। साथ ही इन दूधियों से दूध की खरीद करने वाले बडे दूध डेयरी मालिक भी शामिल हैं, जो अपने टैंकरों से इस मीठे जहर को अन्य जगह पहुंचाने का काम करते हैं। दूध सेंटरों के मालिकों और दूधियों ने अब नए-नए तरीके ईजाद कर लिए हैं, जो जांच में खासी परेशानी पैदा करते हैं। सरसरी जांच में तो इस नकली दूध में फैट, घी और क्रीम पूरा मिलता है, गहराई से जांच के बाद ही इसका खुलासा हो सकता है।

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