April 24, 2024

सारंगपुर। देवों के देव महादेव का प्रिय महीना सावन 14 जुलाई से शुरू होगा। सावन मास में भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा का विधान है। मान्यता है कि सावन मास में भगवान शंकर की पूजा व सोमवार व्रत करने से मनोकामना पूरी होती है। यह समय पूजा-पाठ, तप-साधना के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने में भोलेनाथ की पूजा-अर्चना, अभिषेक करने का विशेष महत्व होता है। इस साल सावन का महीना और भी ज्यादा खास रहने वाला है, क्योंकि इसकी शुरूआत के समय बेहद शुभ संयोग बन रहा है। सावन के पहले ही दिन सावन महीने की शुरूआत के दिन विषकुंभ और प्रीति योग बन रहे हैं। इस बार पूर्णिमा के हिसाब से 4 सोमवार आएंगे। पं. पवन पारिक ने बताया कि इस वर्ष सावन का महीना 14 जुलाई से शुरू होगा और 12 अगस्त तक चलेगा। सावन में 4 पड़ेगे। सावन माह में सोमवार का व्रत रखने को बेहद खास माना गया है। उन्होंने बताया कि 14 को सावन महीने की शुरूआत के दिन विषकुंभ और प्रीति योग बन रहे हैं। ये दोनों योग बेहद शुभ माने गए हैं। धर्म-ज्योतिष के मुताबिक विषकुंभ और प्रीति योग में पैदा हुई संतान बेहद सौभाग्यशाली साबित होती है। इस समय में पैदा हुए जातक जीवन में सारे सुख पाते हैं। मान्यता है कि इस योग में जन्म लेने वाले बच्चे गुणवान और संस्कारी माने जाते हैं। वहीं भगवान शिव को सावन मास में पूजा के दौरान धतूरा, बेलपत्र, भांग के पत्ते, दूध, काले तिल औरगुड अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से शिव की कृपा बनी रहती है। सावन माह में शरीर पर तेल लगाने की मनाही है। शास्त्रों के अनुसार, इस माह में दिन के समय नहीं सोना चाहिए। इस महीने बैंगन का सेवन करने की मनाही होती है। बैंगन को अशुद्ध माना जाता है। भगवान शिव को केतकी का फूल नहीं चढाना चाहिए।