चार्टर्ड अकाउंटेंट युवती ने नाम के अनुरूप ही अपनाई संयम की राह

नलखेड़ा नगर में चल रहे दीक्षा महोत्सव के अंतर्गत अंतिम दिवस सागर वाटिका में बनाए गए मंच से जैसे ही नगर की बेटी संयमी को आचार्य श्री द्वारा ओघा प्रदान किया वैसे ही खुशी मे दीक्षार्थी नाचते हुए नृत्य करने लगी। अपने शरीर पर धारण किए गए स्वर्ण आभूषणों को उतारकर उनका त्याग किया। महोत्सव में हजारों की संख्या में समाजजन, महिलाएं तथा नगरवासी आदि उपस्थित रहे। जोकि दीक्षा समारोह के साक्षी बनकर नगर की बेटी को साध्वी के वेश में देखने के लिए लालायित दिखाई दिए। बेटी संयमी की दीक्षा विधि- विधान पूर्वक संपन्न होने के बाद गुरु भगवंत द्वारा संयमी का साध्वीजी के रूप में नामकरण किया गया। जिसकी उद्घोषणा उनकी भूआजीओं द्वारा मंच के माध्यम से सभी के समक्ष किया। जिसमें संयमी की दीक्षा उपरांत उनका नाम साध्वी सिद्धमपूर्णा श्रीजी म.सा. बनने की घोषणा की गई।

 

रिपोर्ट-अर्पित हरदेनिया