हिन्दु उत्सव समिति के तत्वावधान में निकली रंगारंग गेर, फायर ब्रिगेड़ से जमकर उड़ाया रंग

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महिदपुर। नगर के साथ ही पूरे क्षेत्र में ही रंगपंचमी का पर्व हर्षाेल्लास के साथ शांतीपूर्ण ढंग से मनाया गया सुबह से ही नगर में रंग पंचमी को लेकर लोगो में खासा उत्साह नजर आया वही खासकर बच्चों के द्वारा डतसहित होकर सुबह से ही पिचकारियों में रंग भरकर एक दूसरें को रंगमय किया जानें लगा था। इसी में प्रतिवषार्नुसार इस साल भी हिन्दु उत्सव समिति के तत्वाधान में रंगपंचमी का पर्व उत्साह के साथ मनाये जानें को लेकर नगर के पुराना बस स्टेण्ड़ विजय स्तंभ से रंगारंग गेर का आयोजन किया गया ज्योकि दोपहर 12 बजे से शुरू हुई तथा नगर के प्रमुख मार्गो गांधी मार्ग रणजीत चैक राजेन्द्र मार्ग अंबेड़कर चैक होती हुई पुन: विजय स्तंभ पर पहुॅचकर रंगरंग गेर का समापन हुआ। सैकडों की संख्या में युवा तथा बच्चे गेर में होली का मजा लेते नजर आये तथा एक दूसरें को रंगबिरंगी गुलाल से सरोबार किया साथ ही युवाओं की टोली ड़ीजे पर बज रहे होली के रंग रंगीलें गीतों पर थिरकती हुई गेर में चल रही थी। नगरपालिका की फायर बिग्रेड़ भी गेर में चल रहे लोगो के साथ ही अपनें घरों की गेलरियों तथा छतों पर खडे होकर गेर का मजा ले रहे रहवसियों को रंग से सरोबार करती साथ चल रही थी।
खिलचीपुर
पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद महिला मंडल एवं युवा वैष्णव मंडल द्वारा आयोजित रंग पंचमी पर अनूठा रंगारंग फाग उत्सव आयोजित किया गया।
इस अवसर पर रंग फूल और नृत्य नाटिका गरबा आदि कार्यक्रमों के पूर्व इंदौर से पधारे पुष्टिमार्गीय युवा आचार्य श्री दिवेश कुमार जी द्वारा वैष्णव को संबोधित करते हुए पुष्टीमार्ग की कुछ मयार्दाओं की और ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि ठाकुर जी की हवेली में दर्शन करने के लिए आप लोग जाते हैं मंगला से राजभोग तक क्षणिक निहार कर चले जाते हैं।
थोड़ा समय उन्हें भी देना चाहिए जिनसे हम मिलने जा रहे हैं केवल औपचारिकता निभाना क्या उचित है। उदाहरण स्वरूप आप अपने किसी अभिन्न मित्र या संबंधी से मिलने जाते हैं और केवल जय श्री कृष्ण करके क्या आप आगे बढ़ जाते हैं? आप वहां बैठेंगे कुशल क्षेम का हाल-चाल पूछेंगे अपनी कुशलता से अवगत कराएंगे कुछ खट्टे मीठे वातार्लाप करेंगे और इसके पश्चात ही प्रस्थान करेंगे।
यही प्रतिक्रिया क्या हम ठाकुर जी के दर्शन की समय करते हैं शायद नहीं केवल मंगला जी चरणामृत और कनिका प्राप्त कर घर आ जाते हैं। इतना ही नहीं कुछ वैष्णव तो केवल मंगला की झांकी भी पूरी नहीं निहार कर घर चले जाते हैं। जरा सोचिए यदि यही प्रक्रिया हम अपने संबंधी से या मित्र से मिलने पर करें तो कैसा लगेगा।
वचनामृत के उपरांतवैष्णो द्वारा महाराज श्री को फूलों और रंग गुलाल धारण कर फाग उत्सव मनाया। महिलाओं एवं बालिकाओं नन्हे बच्चों ने अनेक प्रकार की कलाओं का प्रदर्शन किया जिन्हें आचार्य श्री ने सराहा और आशीर्वाद प्रदान किए। कार्यक्रम संचालन में बालकृष्ण करोड़िया मनीष गुप्ता राजेश भानेज परिषद अध्यक्ष दामोदरदास भानेज का योग सराहनीय रामेश्वर दास पगारा वाला द्वारा मां प्रभु की वंदना को सराहा गया।