कंपनी को इंदौर में घटिया बुलेट के बदले देनी ही होगी नई बुलेट

 

राज्य उपभोक्ता आयोग ने दिया फैसला

इंदौर। राज्य उपभोक्ता आयोग ने रायल इनफील्ड (बुलेट) कंपनी की उस अपीलों को निरस्त कर दिया, जिसमें उसने जिला उपभोक्ता आयोग के फैसले को चुनौती दी थी। अब कंपनी को घटिया बुलेट के बदले ग्राहक को नई बुलेट देनी ही होगी।
इंदौर के स्टेडियम ग्राउंड नंदा नगर निवासी अभिषेक लाल ने 4 अप्रैल 2013 को पांच हजार रुपये देकर रायल इनफील्ड बुलेट बुक करवाई थी। 30 अप्रैल 2013 को शेष 1,19,282 रुपये देकर गाड़ी खरीद ली। खरीदी के दिन से ही बुलेट में दिक्कत आ रही थी। खरीदार ने कंपनी में शिकायत की, जिसके बाद सर्विस सेंटर पर बुलेट की सर्विसिंग की गई। इसके बावजूद समस्या बनी रही तो खरीदार ने दोबारा शिकायत की। इसके बाद कंपनी ने बुलेट के कुछ पार्ट्स बदल दिए। फिर भी शिकायत दूर नहीं हुई।
आखिर परेशान होकर अभिषेक ने जिला उपभोक्ता आयोग में कंपनी और कंपनी के डीलर के खिलाफ परिवाद प्रस्तुत किया। इसमें कहा गया कि बार-बार सुधारने के बावजूद बुलेट में समस्या जस की तस है। कंपनी ने जिला आयोग के समक्ष तर्क रखा कि बुलेट में कोई मैन्यूफेक्चरिंग डिफ्केट नहीं है। आशंका है दुर्घटना के बाद बुलेट में खराबी आई हो। इसके लिए कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
24 फरवरी 2020 को जिला उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुनाते हुए कंपनी को आदेश दिया कि ग्राहक को घटिया बुलेट के बदले नई बुलेट दी जाए। कंपनी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग के समक्ष अपील प्रस्तुत की। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति शांतनु केमकर ने कंपनी की अपील निरस्त करते हुए माना कि जिला उपभोक्ता आयोग के फैसले में किसी संशोधन की गुंजाइश नहीं है।