उज्जैन। खाद्य विभाग की नजरअंदाजी के चलते देवास रोड के पेट्रोल पंप संचालक उपभोक्ताओं की जेब को हानि पहुंचाने में लगे हैं। नियमों को ताक में रखकर मनमानी का काम यहां जारी है जिसे रोकने के नाम पर आने वाले खाद्य विभाग के नुमाइंदे मात्र चक्कर लगाकर चले जाते हैं। कागजों में नियमों का ढेर होने के बावजूद इन पंपों पर पालन करवाने वाला कोई नहीं हैं।देवास रोड पर नागझिरी से दताना तक लगभग 10 पेट्रोल पंपों का संचालन हो रहा है लेकिन मजाल है कि एक भी पेट्रोल पंप पूरे नियमों के साथ संचालित हो रहा हो। नियमों की कमियां यहां ढेरों हैं लेकिन खाद्य विभाग के नुमाइंदों को ये नजर ही नहीं आती है और न ही नापतौल विभाग के नुमाइंदे ही इन्हें देखना गवारा समझते हैं। ऐसा नहीं है कि विभागीय नुमाइंदे यहां नहीं आते हैं। बकायदा कागजों में निरीक्षण अंकित होता है लेकिन कार्रवाई एवं कमी के नाम पर कुछ नहीं किया जाता है।उपभोक्ता शिकायत करे तो ही कार्रवाई-हाल यह हैं कि पेट्रोल पंपों पर मनमानी का काम चल रहा है लेकिन निरीक्षण में ये मनमानी नहीं पकडी जाती है। उपभोक्ताओं के शिकायत पर ही कार्रवाई का बहाना लिया जाता है। उपभोक्ताओं के नियमों के जानकार न होने के चलते नियम अंतर्गत शिकायत नहीं हो पाती है और अगर होती है तो उसे मिलीभगत के साथ घुमा दिया जाता है।ये है नियम उल्लंघन की स्थिति –अधिकांश पेट्रोल पंप पर मीटर जीरो से शुरू नहीं हो रहा है। कैलिब्रेशन में हेरा-फेरी, चिप / रिमोट से डिलीवरी की आशंका बन रही है। 5 लीटर के स्टैंडर्ड मेजर से चेक करने पर कमी निकलना की व्यवस्था नहीं। क्वालिटी की गड़बड़ की स्थिति है।इथेनाल का प्रतिशत तय से अधिक हो रहा है। डेंसिटी चेक रजिस्टर मेंटेन नहीं किए जा रहे हैं। यही नहीं प्रति दिन की डेंसिटी टेस्ट नहीं की जा रही है न ही सूचना पटल पर उसका उल्लेख किया जा रहा है।टैंक में पानी की मात्रा अधिक होने की आशंका भी बराबर बन रही है।सुरक्षा में भी कमियां -पेट्रोल पंपों पर लगे अग्निशमन उपकरण की मियाद समाप्त हो चुकी है या खाली पडे हैं। बालू रेती के बकेट में रेत ही नहीं है। धुम्रपान बोर्ड, इमरजेंसी नंबर, एग्जिट बोर्ड गायब हैं। स्टाफ बगैर रहते हैं। मोबाइल यूज रोकने को लेकर भी काम नहीं करते हैं। पंप पर मोबाइल यूज मशीन के पास ही होता रहता है। बार कोड मशीन के उपर से ही स्केन करवाकर भूगतान लिया जा रहा है। अर्थिंग / स्टैटिक चार्ज का इंतजाम खराब है। टैंकर अनलोडिंग के समय सेफ्टी कोन, अर्थिंग वायर का उपयोग भी नहीं किया जाता है।सूचना पट्ट का अभाव-हाल यह हैं कि पेट्रोल पंप का लायसेंस उपभोक्ता के सदृश्य लगाया जाना चाहिए लेकिन यहां लायसेंस और उसका नंबर देखना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हैं। उपभोक्ता के मांगने पर शिकायत पुस्तिका भी नहीं दी जाती है। एक्सप्लोसिव लाइसेंस, नापतौल प्रमाण -पत्र, प्रदुषण बोर्ड का अनापत्ति प्रमाण पत्र एक्सपायर्ड होना ,रेट बोर्ड, स्टॉक बोर्ड, का प्रदर्शन भी गायब रहता है। लायसेंस शर्त के अनुसार फ्री हवा, टॉयलेट, पीने के पानी की सुविधा का भी कई जगह अभाव जैसा है अगर है तो इतनी गंदगी का की उसे देखने पर ही उपभोक्ता लौट जाता है। कुछ पंपों पर स्टाफ बिना यूनिफॉर्म / ID के काम करता है। ग्राहक के जीरो देखने के पूर्व ही जल्दी में नोजल वाहन के टेंक में लगा दिया जाता है।मौलिक सुविधाओं का अभाव-इन पंपों पर इलेक्ट्रिक वाहनों में हवा के लिए साफ तौर पर मना किया जा रहा है जबकि टायरों में हवा नि:शुल्क भरना है। कई पर मशीन खराब होने के साथ कर्मचारी न होने का बहाना बनाया जाता है। महिला और पुरुष के लिए अलग टायलेट होना अनिवार्य है। गंदगी होना आम हो चुका है।
देवास रोड के पंप संचालक उपभोक्ताओं की जेब डेमेज करने में लगे खाद्य विभाग की नजरअंदाजी ,पेट्रोल पंप संचालकों की मनमानी -कागजों में नियमों का ढेर,पंपों पर पालन करवाने वाला कोई नहीं